Monsoon 2026: केरल, असम, कर्नाटक और ओडिशा में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। केरल में बारिश और बाढ़ से अब तक 25 लोगों की मौत हुई है, जबकि हजारों लोग राहत शिविरों में पहुंचाए गए हैं। असम में बाढ़ का पानी कुछ इलाकों में कम हुआ है, लेकिन लाखों लोग अब भी प्रभावित हैं और मृतकों की संख्या 89 हो गई है। तटीय कर्नाटक में मूसलाधार बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। वहीं, ओडिशा के कई जिलों में बाढ़ का असर कायम है और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में फिर भारी बारिश की चेतावनी दी है। लगातार बिगड़ते मौसम के बीच प्रशासन और आपदा राहत टीमें प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं। ऐसे में खराब मौसम के दौरान मौसम विभाग ने लोगों को
मानसून की मार से बेहाल राज्य
केरल में 25 लोगों की मौत
केरल में एक अगस्त से जारी मूसलाधार बारिश से संबंधित घटनाओं में 25 लोगों की मौत हो गई जबकि चार लोग लापता बताये जा रहे और 10 अन्य लोग घायल हुए हैं। राज्य सरकार ने अपडेट दिया कि भारी बारिश के कारण हजारों लोगों को राहत शिविरों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। सरकार के अनुसार, एक अगस्त से चार अगस्त के बीच 52 मकान पूरी तरह तबाह हो गए, जबकि 565 घरों को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा है। सरकार ने बताया कि राज्य भर में बनाए गए 400 से अधिक राहत शिविरों में 18,000 से अधिक लोगों को ठहराया गया है। राहत शिविरों में सबसे अधिक लोग पत्तनमथिट्ठा (7,852), कोट्टायम (5,288) और अलाप्पुझा (2,651) जिलों से स्थानांतरित किए गए हैं, जहां कई इलाके अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि के दौरान राज्य में सामान्य से लगभग तीन गुना अधिक बारिश हुई है। मौसम विभाग ने बताया कि एक से चार अगस्त के बीच केरल में सामान्य 73.2 मिलीमीटर (मिमी) के मुकाबले 205.8 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 181 प्रतिशत अधिक है।
रेड अलर्ट, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी
केरल के कई हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश के मद्देनजर भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के पत्तनमथिट्ठा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्णाकुलम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा, मौसम विभाग ने चार जिलों अलप्पुझा, त्रिशूर, पलक्कड़ और मलप्पुरम में ऑरेंज अलर्ट तथा अन्य दो जिलों तिरुवनंतपुरम व कोल्लम में येलो अलर्ट जारी किया है। इससे पहले, मौसम विभाग ने बताया कि 21 घंटों के दौरान उत्तरी जिलों में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई। बारिश जारी रहने से अलप्पुझा, पत्तनमथिट्ठा, कोट्टायम और कोझिकोड के कई निचले तथा नदी के तटीय इलाके अब भी जलमग्न हैं, जिससे लोगों को राहत शिविरों में जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस आपदा में लोगों के अहम दस्तावेज और बच्चों की स्कूल की किताबें भी बह गई हैं। राज्य के पर्यटन मंत्री पी.सी. विष्णुनाथ ने कहा कि बाढ़ में गुम हुए दस्तावेज को दोबारा बनवाने के लिए विशेष अदालतें लगाई जाएगीं और सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि बच्चों को जरूरी पाठ्यपुस्तकें और अन्य अध्ययन सामग्री मिले। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने फिलहाल प्रत्येक वार्ड में सफाई कार्य के लिए 25,000 रुपये मंजूर किए हैं और कई स्वयंसेवी संगठन उन घरों की सफाई में मदद के लिए आगे आए हैं जहां पानी घुस गया था। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि जिन लोगों ने अपने घर और आजीविका खो दी है, उन्हें बिना किसी देरी के वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
असम में बाढ़ के हालात में थोड़ा सुधार, अब तक 89 लोगों की मौत
बात अगर असम की करें तो यहां मंगलवार को बाढ़ की स्थिति में और सुधार हुआ तथा प्रभावित लोगों की संख्या घटकर पांच जिलों में 1.22 लाख रह गई, हालांकि दो और लोगों की मौत के बाद इस साल बाढ़ में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 89 हो गई। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की मंगलवार शाम जारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटे में बाढ़ के कारण दो लोगों की मौत हुई। शिवसागर और गोलाघाट जिलों में दो लोगों की मौत दर्ज की गई, जिसके बाद इस साल बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों की कुल संख्या 89 हो गई है। एएसडीएमए की दैनिक बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार, चराइदेव, धेमाजी, गोलाघाट, जोरहाट और शिवसागर जिलों में अब भी 1,22,100 से अधिक लोग प्रभावित हैं। शिवसागर सबसे अधिक प्रभावित जिला रहा, जहां करीब 60,000 लोग प्रभावित हैं। इसके बाद चराइदेव (31,000) और जोरहाट (20,000) का स्थान है। सोमवार की तुलना में बाढ़ की स्थिति में सुधार हुआ है। सोमवार को छह जिलों में 1.28 लाख से अधिक लोग प्रभावित थे। ASDMA ने बताया कि प्रशासन चार जिलों में 55 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र संचालित कर रहा है, जहां वर्तमान में 17,857 प्रभावित लोगों की देखभाल की जा रही है। पिछले 24 घंटे में राज्य के बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच 99.63 क्विंटल चावल, 18.47 क्विंटल दाल, 6.24 क्विंटल नमक और 608.83 लीटर सरसों तेल वितरित किया गया है। ASDMA का कहना है कि वर्तमान में असम के 365 गांव पानी में डूबे हुए हैं और 15,342.92 हेक्टेयर फसल क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। राज्य के कई जिलों में बाढ़ के पानी से तटबंधों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। फिलहाल धानसिरी नदी नुमालीगढ़ में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बाढ़ के कारण राज्यभर में 26,575 घरेलू पशु और मुर्गियां भी प्रभावित हुई हैं।
तटीय कर्नाटक में बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
वहीं तटीय कर्नाटक में मंगलवार को मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। उडुपी जिले के कुडांपुर तालुक में हकलाडी में पिछले 24 घंटों में सर्वाधिक 189 मिलीमीटर (मिमी) वर्षा दर्ज की गई। एक बयान में यह जानकारी दी गयी है। कर्नाटक राज्य आपदा निगरानी केंद्र द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, अरब सागर और पश्चिमी घाट क्षेत्र के ऊपर दक्षिणपश्चिम मानसून की सक्रियता से इस पूरी तटीय क्षेत्र में भारी बारिश हुई है। दक्षिण कन्नड़ जिले में भी भारी वर्षा दर्ज की गई जहां उप्पीनांगडी में 122.8 मिमी तथा बेलथांगडी में 100.8 मिमी बारिश हुई। धर्मस्थल में 76.2 मिमी, मूडबिदरी में 74.4 मिमी, बंतवाल में 274 मिमी और मंगलुरु में 23.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई। उत्तर कन्नड़ जिले में जोइडा में सर्वाधिक 148.6 मिमी, जागलबेट में 67 मिमी, गेरसोप्पा में 46.2 मिमी और किरावट्टी में 32.4 मिमी वर्षा हुई। इस तटीय क्षेत्र में व्यापक वर्षा से निचले इलाकों में जलजमाव होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया । नेत्रावती और इसकी सहायक नदिया खतरे के निशान के करीब पहुंच गयी हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भारी से बहुत भारी बारिश के साथ 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना जताई है। तटीय जिलों के जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की इकाइयों और स्थानीय आपात मोचन दलों को पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन एवं बाढ़ की संभावित स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर रखा है। प्रशासन ने मछुआरों को प्रतिकूल मौसम को देखते हुए अरब सागर में जाने से परहेज करने की सलाह दी है।
ओडिशा के मयूरभंज में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट
इसके अलावा भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बुधवार से ओडिशा में बारिश का नया दौर शुरू होने का अनुमान जताया है। जबकि कई जिलों के गांव अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि कई नदियों का जलस्तर घटने लगा है, लेकिन जाजपुर, भद्रक और जगतसिंहपुर जिलों के अनेक गांवों से बाढ़ का पानी अब तक नहीं उतरा है। इसके कारण बड़ी संख्या में लोग अभी भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। अधिकारियों के अनुसार, जाजपुर जिले के दशरथपुर, भद्रक जिले के बसुदेवपुर तथा जगतसिंहपुर जिले के कुजंग और तिरतोल क्षेत्रों के लोग अब तक अपने गांवों में नहीं लौट सके हैं, क्योंकि वहां जाने वाली सड़कें अभी भी बाढ़ के पानी में डूबी हुई हैं। IMD ने बताया कि बारिश का दौर पांच अगस्त से शुरू होकर 10 अगस्त तक जारी रह सकता है। बुधवार को मयूरभंज में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि छह अगस्त को मयूरभंज और क्योंझर के लिए भी चेतावनी जारी की गई है। मुख्य सचिव अनु गर्ग ने विभागों को बाढ़ से क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत और प्रभावित लोगों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। हालिया बाढ़ से राज्य के 22 जिलों में 8,63,909 लोग प्रभावित हुए हैं और 1,458 गांव इसकी चपेट में आए हैं। बाढ़ में छह लोगों की मौत हुई है, जबकि 3,567 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। हीराकुंड बांध से फिलहाल 13 गेटों के जरिए पानी छोड़ा जा रहा है।
