Haridwar News: हरिद्वार में शुरू हुआ ‘वेज बिरयानी बनाम वेज पुलाव’ का विवाद अब एक बड़े जन-अभियान का रूप लेता नजर आ रहा है। अखंड परशुराम अखाड़े की पहल पर चलाए जा रहे इस अभियान को रविवार को उस समय और मजबूती मिली, जब संत समाज, ब्राह्मण समाज तथा मुस्लिम समुदाय के लोग एक मंच पर आए।
हरिद्वार में 'वेज बिरयानी' की जगह वेज पुलाव' लिखने की उठी मांग
सभी ने मिलकर हरिद्वार और कनखल क्षेत्र की दुकानों, ठेलों और रेहड़ी-पटरियों पर लगे “वेज बिरयानी” के बोर्ड और पोस्टर हटाने का अभियान चलाया। इसके स्थान पर व्यापारियों को “वेज पुलाव” लिखे नए पोस्टर और स्टिकर लगाने के लिए प्रेरित किया गया। अभियान के समर्थकों का कहना है कि शाकाहारी व्यंजनों को उनकी पारंपरिक पहचान के अनुरूप प्रस्तुत किया जाना चाहिए, जिसके तहत 'वेज बिरयानी' की जगह 'वेज पुलाव' नाम का इस्तेमाल किया जाना अधिक उचित है।
किसने किया अभियान का मार्गदर्शन?
इस जनजागरण अभियान का नेतृत्व श्री हिंदू तख्त के प्रदेश अध्यक्ष यश देव कौशिक के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में जूना अखाड़े के संत-महात्माओं, ब्राह्मण समाज के गणमान्य प्रतिनिधियों और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी बड़ी संख्या में भागीदारी की। उपस्थित सभी लोगों ने एकमत होकर कहा कि हरिद्वार की धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक पहचान को संरक्षित रखने के लक्ष्य से यह अभियान संचालित किया जा रहा है।
वेज बिरयानी के नाम से आपत्तियां
अभियान के दौरान श्री हिंदू तख्त के प्रदेश अध्यक्ष यश देव कौशिक ने बताया कि लंबे समय से हरिद्वार के कई मंदिरों, प्रमुख सार्वजनिक स्थलों और धार्मिक क्षेत्रों के आसपास "वेज बिरयानी" के नाम से खाद्य पदार्थों की बिक्री की जा रही थी। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की ओर से लगातार आपत्तियां और नाराजगी जताई जा रही थी, जिसके बाद इस विषय ने व्यापक चर्चा का रूप ले लिया।
"वेज पुलाव" जैसे शब्द का इस्तेमाल
यश देव कौशिक ने कहा कि इस पहल का लक्ष्य किसी व्यापारी या व्यवसाय को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि हरिद्वार की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित बनाए रखना है। उन्होंने बताया कि "बिरयानी" शब्द को लेकर समाज के एक वर्ग में लंबे समय से आपत्ति और असहजता की भावना रही है। ऐसे में लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए खाद्य पदार्थ के लिए "वेज पुलाव" जैसे शब्द का उपयोग अधिक उपयुक्त माना जाना चाहिए।
