Manipur Violence : देश के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर मे इन दिनों हालात सामान्य नहीं हैं। इसे देखते हुए अब हरियाणा सरकार ने वहां दंगों के बीच फंसे हरियाणा के छात्रों को निकालने के प्रसास शुरू कर दिए हैं। हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी संजीव कौशल ने मणिपुर के अधिकारियों से इस संबंध में बातचीत की और पानीपत के छात्रों की सुरक्षा की चिंता जताई। जिसके बाद पानीपत के सात छात्रों को IIT इंफाल से शिफ्ट कर दिया गया। बता दें कि इससे पहले कांग्रेस से राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने राज्य सरकार से छात्रों की सुरक्षित घर वापसी कराने की बात कही थी।
मणिपुर हिंसा में हरियाण के छात्र फंसे हैं। (प्रतीकात्मक फोटो)
क्या बोले हुड्डा
मणिपुर हिंसा के बीच फंसे हुए छात्रों की जानकारी देते हुए ट्विटर पर हुड्डा ने लिखा कि 'मैं हरियाणा सरकार को अवगत कराना चाहता हूं कि मणिपुर में हो रहे सामाजिक दंगों के बीच में वहां नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मणिपुर में हरियाणा के आठ छात्र फंसे हुए हैं। सरकार से अनुरोध है कि उन छात्रों की सकुशल घर वापसी सुनिश्चित की जाए। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) के छात्र बताए जा रहे हैं।'
दीपेंद्र हुड्डा का ट्वीट।
अन्य राज्यों के छात्र भी फंसे
मणिपुर में हिंसा के बीच सिर्फ हरियाणा ही नहीं बल्कि इसके साथ-साथ उत्तर प्रदेश, बिहार के स्टूडेंट्स भी फंसे हुए हैं। इस मामले का संज्ञान दिलाते हुए बिहार के सीएम नीतीश कुमार केंद्र सरकार से छात्रों को सुरक्षित निकालने की मांग कर चुके हैं। वहीं, इस मुद्दे को लेकर जमकर सियासत भी हो रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मणिपुर हिंसा के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि BJP की नफरत-बांटने की राजनीति और सत्ता के लालच के चलते वहां पर ऐसे हालात उत्पन्न हुए हैं। उन्होंने सभी पक्षों को संयम बरतने की नसीहत भी दी है।
हिंसा की क्या है वजह
ऑल इंडिया ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन ने मणिपुर में एक ट्राइबल सॉलिडेरटी मार्च बुलाया था। इस दौरान वहां पर आदिवासी और गैर-आदिवासी समुदायों में कहासुनी हो गई। बात आगे बढ़ाते हुए कुछ लोगों ने जब हाथापाई की कोशिश की वहां पर दोनों पक्षों में तीखी झड़प हो गई। बता दें कि इस पूरे की मूल वजह है, गैर-आदिवासी मैतेई समुदाय को शेड्यूल ट्राइब (ST) का दर्जा दिए जाने की पुरजोर मांग। हालांकि आदिवासी समुदाय इस मांग के विरोध में है। गौरतलब है कि हालात सामान्य न हो पाने की वजह से मणिपुर के आठ जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया और मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को भी बंद करने का फैसला ले लिया गया।
