Gurugram News: गुरुग्राम साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन (ईस्ट) ने रिटायर्ड एयर मार्शल टी. एस. चटवाल के साथ जनवरी 2025 में हुई करीब 2.65 करोड़ रुपये की इन्वेस्टमेंट ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर अपराधियों के सेकंड लेयर नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गाजियाबाद, दिल्ली और हरियाणा के बहादुरगढ़ से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एसीपी साइबर क्राइम गौरव फोगाट ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि ठगी की रकम में से 6 लाख रुपये इंडियन ओवरसीज बैंक के एक संयुक्त बैंक खाते में भेजे गए थे। यह खाता सोनू चौधरी और आकाश सोनी के नाम पर संचालित था। बैंक रिकॉर्ड की जांच के आधार पर पुलिस ने गाजियाबाद से सोनू चौधरी को गिरफ्तार किया।
बैंक खाते बेचकर चल रहा था साइबर फ्रॉड का खेल
क्या-क्या हुआ बरामद?
पूछताछ में सोनू ने खुलासा किया कि उसने अपना बैंक खाता बहादुरगढ़ निवासी पुनीत को उपलब्ध कराया था, जो बैंक खातों की व्यवस्था करने का काम करता था। इसके बाद पुलिस ने बहादुरगढ़ की ओमैक्स सिटी में छापेमारी कर पुनीत के साथ अभिषेक, विकास और दुष्यंत को भी गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि पुनीत, दिल्ली के द्वारका निवासी सम्राट के निर्देश पर बैंक खातों को आगे साइबर गिरोहों तक पहुंचाने का काम करता था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन लैपटॉप, 16 मोबाइल फोन, 90 एटीएम कार्ड, 42 चेकबुक, 33 सिम कार्ड, कई रबर स्टांप और एक पासपोर्ट बरामद किया। पासपोर्ट की जांच में साल 2023 से 2026 के बीच दुबई की चार यात्राओं के रिकॉर्ड भी मिले हैं।
पूरे मामले की जांच जारी
पुलिस के अनुसार पूछताछ में यह जानकारी भी सामने आई कि पुनीत दुबई में मौजूद कथित हैंडलर रुद्र के संपर्क में था और उससे मुलाकात करने के लिए कई बार दुबई गया था। शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि वहीं से साइबर ठगी के लिए बैंक खाते जुटाने और उन्हें विभिन्न गिरोहों तक पहुंचाने का नेटवर्क संचालित किया जाता था। जांच एजेंसियां अब इस अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क की पूरी श्रृंखला को खंगालने में जुटी हैं। पुलिस को यह भी पता चला है कि बरामद बैंक खातों के खिलाफ राजस्थान, तेलंगाना, झारखंड, केरल और कर्नाटक सहित छह राज्यों में साइबर ठगी से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। फिलहाल बरामद सिम कार्ड, बैंक खातों और अन्य डिजिटल सबूतों की विस्तृत जांच की जा रही है, ताकि ठगी के पूरे नेटवर्क और कुल रकम का पता लगाया जा सके।
