गांधीनगर : मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के सुशासन के पांच वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इस अवधि के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, प्रौद्योगिकी और नवाचार के साथ विद्यार्थियों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में शिक्षा के क्षेत्र में शुरू की गई पहलों को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में स्कूली एवं उच्च शिक्षा, दोनों क्षेत्रों में सुविधाओं और अवसरों का विस्तार किया गया है।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल
‘नमो लक्ष्मी’ योजना के तहत उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में 25 लाख से अधिक छात्राओं को 2,110 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता प्रदान की जा रही है। योजना शुरू होने के बाद अब तक 25 लाख से अधिक छात्राओं को 2,110 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा, ‘नमो सरस्वती विज्ञान साधना’ योजना के तहत वर्ष 2024-25 से अब तक 3.54 लाख से अधिक विद्यार्थियों को 290 करोड़ रुपए की सहायता, जबकि ‘मुख्यमंत्री ज्ञान साधना मेरिट स्कॉलरशिप’ योजना के तहत वर्ष 2023-24 से अब तक 176 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता प्रदान की गई है।
13,353 नए क्लासरूम
गुजरात में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया है। ‘मिशन स्कूल्स ऑफ एक्सीलेंस’ के तहत अब तक 13,353 नए क्लासरूम, 21,000 नई कंप्यूटर लैब, 1,09,000 नए स्मार्ट क्लासरूम और 5,000 नई STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) लैब का कार्य पूर्ण किया गया है।
वर्ष 2024 की भर्ती में सरकारी एवं गैर-सरकारी अनुदानित माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में 9,400 शिक्षा सहायक तथा 470 प्रधानाध्यापक की भर्ती की गई है। साथ ही, 2,230 पुराने शिक्षकों की भर्ती/स्थानांतरण किया गया है। वर्ष 2026-27 में 200 नए कंपोजिट, 95 नए सरकारी माध्यमिक तथा 3 नए उच्चतर माध्यमिक स्कूलों को मंजूरी दी गई है।
वर्ष 2026 में कन्या केळवणी महोत्सव (कन्या शिक्षा महोत्सव) एवं शाला प्रवेशोत्सव के 24वें संस्करण का आयोजन किया गया। राज्य के सभी स्कूलों में ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को समाप्त कर दिया गया है तथा आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत कक्षा-1 में प्रवेश के लिए आय सीमा में वृद्धि की गई है।
ड्रॉपआउट में कमी से समावेशी शिक्षा तक
वर्ष 2001-02 में कक्षा 1 से 8 तक का ड्रॉपआउट रेट 37.22 फीसदी था, जो वर्ष 2024-25 में घटकर 2.35 फीसदी रह गया है। संभावित ड्रॉपआउट की समय रहते पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम (ईडब्ल्यूएस) लागू किया गया है। इसके माध्यम से अब तक लगभग 1,68,000 विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें शिक्षा पूरी करने के लिए मार्गदर्शन दिया गया है।
उच्च शिक्षा, अनुसंधान और स्टार्टअप को गति
विद्यार्थियों को अपने गृह क्षेत्र के निकट उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पिछले पांच वर्षों में गैर-आदिवासी क्षेत्रों में 24 तथा आदिवासी क्षेत्रों में 17 सहित कुल 41 नए सरकारी कॉलेज शुरू की गई हैं। इसके अलावा 15 सरकारी कॉलेजों में नए संकाय शुरू किए गए हैं। मुख्यमंत्री युवा स्वावलंबन योजना के तहत पिछले पांच वर्षों में 3,97,415 विद्यार्थियों को 2,068.67 करोड़ रुपए, जबकि मुख्यमंत्री कन्या केळवणी निधि योजना के तहत 24,802 छात्राओं को 797.01 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान की गई है।
पीएचडी विद्यार्थियों के लिए SHODH योजना के तहत पिछले पांच वर्षों में 113.52 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान की गई है। वहीं एसएसआईपी 2.0 (स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी 2.0) के तहत 6,077 प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट को 2.50 लाख रुपए तक की सहायता प्रदान की गई है और विद्यार्थियों के नवाचारपूर्ण विचारों से 962 स्टार्टअप स्थापित हुए हैं।
