ग्रेटर नोएडा: अनचाहे गर्भ की संभावना से बचने के लिए नसबंदी की (वासेक्टोमी रिवर्सल) प्रक्रिया से महिलाएं गुजरती हैं, लेकिन ये कितना सुरक्षित है यह कहना ठीक नहीं। कभी-कभार इसके असफल होने के चांस भी देखे गए हैं। ऐसा ही एक ताजा मामला ग्रेटर नोएडा के दनकौर से सामने आया है। जहां, एक महिला ने नसबंदी के आठ साल बाद बच्ची को जन्म दिया है। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन कराया था, जिसका आठ साल बाद खामियाजा भुगतना पड़ा है। उन्होंने चिकित्सकों पर लापरवाही से असफल ऑपरेशन करने का आरोप लगाया है।
नसबंदी रहित महिला ने दिया बच्चे को जन्म
2016 में कराई नसबंदी
पीड़ित महिला ने संबंधित कोतवाली में मामले की शिकायत दर्ज कराई है। गौरव नामक शख्स ने शिकायती पत्र में पुलिस को बताया है कि साल 2016 में उन्होंने अपनी पत्नी आरती की दनकौर स्वास्थ्य केंद्र पर नसबंदी कराई थी। उन्होंने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर आरोप लगाते हुए बताया कि उनकी पत्नी ने करीब 3 दिन पूर्व एक बच्ची को जन्म दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें नसंबदी से पूर्व तीन बच्चे हैं। लिहाजा, उन्होंने पत्नी की नसबंदी कराई थी, जिसे डॉक्टरों की ओर से लापरवाही से अंजाम दिया गया।
ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर का ट्रांसफर
पीड़ित परिवार का कहना है कि इस संबंध में उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शिकायत दर्द कराई, जहां उन्हें यह कहकर भेज दिया गया कि जिस चिकित्सक ने ऑपरेशन किया था, उसका किसी अन्य जगह ट्रांसफर हो गया है। उधर, दैनिक जागरण के हवाले से कोतवाली प्रभारी संजय कुमार सिंह का कहना है कि पीड़ित महिला की शिकायत ले ली गई है, जिसके आधार पर जांच कर मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे असफल होती है नसबंदी
डॉक्टरों के मुताबिक, अगर नसबंदी के दौरान फैलोपियन ट्यूब कम से कम क्षतिग्रस्त हुई हों, तो प्रेग्नेंसी की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में डॉक्टरों को इन सभी बारीकियों का ख्याल रखना होता है, अगर थोड़ी सी चूक हुई तो उसका खामियाजा महिला को उठाना पड़ता है।
