Online Registration of Pet Dogs: ग्रेटर नोएडा में पालतु कुत्तों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन इस सप्ताह से शुरू करने की तैयारी है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए आपको कोई फीस नहीं देनी होगी। प्राधिकरण के मित्रा ऐप पर जल्द ही एक लिंक एक्टिव की जाएगी। जिस पर जाकर लोग अपने पालतू कुत्तों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इस प्लेटफॉर्म पर यह प्रक्रिया बिल्कुल फ्री होगी। पालतु कुत्तों का रजिस्ट्रेशन न होने पर 2000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
पालतू कुत्तों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन
जल्द शुरू होगी प्रक्रिया
पालतू कुत्तो के ऑनलाइन पंजीकरण के लिए GNIDA बोर्ड ने इस साल जून में एक संशोधित नीति के प्रस्ताव को स्वीकार किया था। जिसमें आम नागरिकों, RWA/AOA और NGO के सुझावों को भी शामिल किया गया था। प्राधिकरण बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद इस पॉलिसी को धरातल पर लाने की तैयारी शुरू की गई। आगमी एक-दो दिनों में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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रजिस्ट्रेशन न कराने पर जुर्माना
संशोधित नीति के तहत पालतू कुत्तों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने पर कोई फीस नहीं ली जाएगी। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तीन महीने की बजाय पूरे साल चलेगी। इस नीति के अनुसार किसी पालतू कुत्ते का रजिस्ट्रेशन न होने की शिकायत मिलने पर मालिक पर 2000 रुपये का जुर्माना लगेगा। इसके अलावा पालतू कुत्ते को सर्विस लिफ्ट का इस्तेमाल करना होगा। अगर लिफ्ट में कोई व्यक्ति पहले से है, तो पालतू कुत्ते और उसके मालिक को उसके खाली होने का इंतजार करना होगा। हालांकि दोनों की आपसी सहमति होने पर एक साथ लिफ्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है।
पेट फीडिंग प्वाइंट होंगे चिन्हित
इस नीति के तहत RWA/AOA और वहां के निवासी मिलकर पालतू कुत्तों के खाने के स्थानों (Pet feeding points) को चिन्हित करेंगे। एनजीओ की सहायता से पीपीपी मॉडल पर शेल्टर होम भी बनाया जाएगा। इसके लिए जमीन प्राधिकरण द्वारा दी जाएगी और इसका संचालन संबंधित एनजीओ करेगा।
तकनीकी समस्याओं के चलते हुई देरी
प्राधिकरण पिछले कुछ समय से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन कुछ तकनीकी समस्याओं के चलते इसमें देरी हुई। जिसे अब सुलझा लिया गया है। अब प्राधिकरण जल्द ही अपने आधिकारिक ऐप पर एक लिंक प्रदान करेगा। जिससे लोग अपने कुत्तों का पंजीकरण कर सकेंगे। हालांकि इससे पहले भी एक नीति तैयार की गई थी। जिसमें कई खामियों के चलते उसे लागू नहीं किया जा सकता। जिसकी वजह से प्राधिकरण को इसे संशोधित करना पड़ा।
