Gorakhpur News: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मौजूदा बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन को नियम-कायदों की उलझनों में डाल दिया है। यह मामला एमबीबीएस के 2014 बैच के एक छात्र से जुड़ा है, जो दस साल से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी पहले वर्ष से आगे नहीं बढ़ पाया है। अधिकारियों के अनुसार स्थिति इसलिए और मुश्किल हो गई है क्योंकि छात्र के पिता न तो कॉलेज के फोन कॉल का जवाब दे रहे हैं और न ही अपने बेटे के भविष्य को लेकर कोई रुचि दिखा रहे हैं।
गोरखपुर: MBBS का ‘एवरग्रीन फ्रेशर’
कॉलेज प्रशासन के मुताबिक, छात्र 2014 से नए स्नातक छात्रावास में रह रहा है, लेकिन बीते 11 वर्षों में वह एमबीबीएस के प्रथम वर्ष की परीक्षा एक बार भी पास नहीं कर पाया। वर्ष 2015 में परीक्षा में विफल रहने के बाद उसने न तो पुनः परीक्षा फॉर्म भरा और न ही आगे किसी परीक्षा में शामिल हुआ। पढ़ाई में उसकी नियमित भागीदारी भी नहीं दिखाई देती। अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान चिकित्सा शिक्षा नियमों के तहत प्रथम वर्ष में फेल होने वाले छात्रों को दोबारा प्रवेश लेने की जरूरत नहीं होती वे सिर्फ परीक्षा फॉर्म भरकर फिर से परीक्षा दे सकते हैं।
कई बार किया गया पिता को फोन
इस नियम का सहारा लेते हुए छात्र का नामांकन अब भी वैध माना जा रहा है, जिस वजह से कॉलेज प्रशासन उसके प्रवेश को रद्द नहीं कर पा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि कई बार समझाने-बुझाने के बाद भी जब स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया, तो संस्थान ने छात्र के पिता से संपर्क करने की कोशिश की। प्रधानाचार्य कार्यालय से उन्हें तीन बार फोन किया गया और कॉलेज बुलाया गया, लेकिन वे अब तक मिलने नहीं आए। हालात और भी पेचीदा हो गए हैं क्योंकि नामांकन जारी रहने के चलते छात्र को छात्रावास से बाहर करना भी मुश्किल हो रहा है।
कॉलेज ने मांगी एनएमसी से सलाह
चूंकि मेस शुल्क परीक्षा फॉर्म के साथ ही जमा कराया जाता है, इसलिए उसने कई वर्षों से न तो फॉर्म भरा और न ही मेस का भुगतान किया इसके बावजूद उसे बिना शुल्क के भोजन मिलता रहा। अब कॉलेज ने इस पूरे मामले पर दिशा-निर्देश पाने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद (एनएमसी) से सलाह मांगी है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल का कहना है कि एनएमसी से स्पष्ट निर्देश मिलने के बाद ही अंतिम फैसला किया जाएगा।
(इनपुट - भाषा)
