गोवा की दो प्रमुख नदियों मांडवी और ज़ुआरी के किनारों पर पर्यावरण संरक्षण की कवायद चल रही है। राज्य के वन विभाग ने करीब 6,729.54 हेक्टेयर यानी लगभग 6.72 करोड़ वर्गमीटर क्षेत्र को पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील और पारिस्थितिक (Ecological) रूप से कमजोर घोषित करते हुए उसके संरक्षण के लिए नियामकीय कार्रवाई की मांग की है। यह पहल राज्य के वन मंत्री विश्वजीत के निर्देश के बाद शुरू हुई है।
मांडवी नदी
वन विभाग की ओर से नगर एवं ग्राम नियोजन (TCP) विभाग को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मांडवी और ज़ुआरी नदी तटों के आसपास ऐसे कई इलाके चिन्हित किए गए हैं, जहां अनियंत्रित निर्माण, भूमि भराव और व्यावसायिक गतिविधियों से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका है। विभाग ने इन क्षेत्रों की विस्तृत मैपिंग भी तैयार की है, जिसे आगे की समीक्षा और संरक्षणात्मक कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को सौंपा गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, इन संवेदनशील इलाकों में मैंग्रोव बेल्ट, तटीय जैव विविधता वाले क्षेत्र और नदी तंत्र को सुरक्षित रखने वाले प्राकृतिक भू-भाग शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मांडवी और ज़ुआरी नदी तंत्र गोवा के पारिस्थितिक संतुलन, मत्स्य संसाधन और बाढ़ नियंत्रण के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
रियल एस्टेट विस्तार पर विवाद
वन विभाग ने TCP विभाग से मौजूदा कानूनों और नियमों के तहत तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया है, ताकि इन क्षेत्रों में अनियंत्रित विकास और व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। हाल के वर्षों में गोवा में भूमि परिवर्तन, रियल एस्टेट विस्तार और नदी किनारे निर्माण को लेकर लगातार विवाद होते रहे हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम माना जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, नई मैपिंग के बाद, इन संवेदनशील नदी के किनारों पर रेत खनन गतिविधियों पर और अधिक सख्ती कर दी गई है, जिससे अवैध रेत खनन को रोकने में मदद मिलेगी। वन विभाग ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को इन क्षेत्रों के आसपास के भूमि उपयोग को नियंत्रित करने और कानून के तहत एक्शन लेने के लिए प्लान तैयार किया है।
