Ghaziabad News: गाजियाबाद में जेल प्रशासन की बड़ी सुरक्षा चूक सामने आई है। चोरी के आरोप में जेल में बंद एक अरोपी फिल्मी स्टाइल में अपने साथी की जमानत पर जेल से बाहर निकल आया। बताया जा रहा है कि दोनों चोरी के आरोप में एक साथ जेल पहुंचे थे और यहां पर नाम बदलकर जेल से जुड़े सुरक्षा कर्मियों को गुमराह किया। जिसकी वजह से कोर्ट ने जब एक आरोपी को जमानत दी तो उसकी जगह पर दूसरा आरोपी जेल से बाहर आ गया। हालांकि अगले ही दिन इस धोखाधड़ी का पर्दाफाश हो गया। इसके बाद पुलिस ने दोनों को फिर से जेल भेज दिया। इस संबंध में जेल प्रशासन द्वारा मसूरी थाना में गढ़मुक्तेश्वर के रहने वाले आरोपी तारा चंद्र और बाबू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
नाम बदलकर जेल प्रशासन से धोखधड़ी (प्रतीकात्मक तस्वीर)
इस घटना की जानकारी देते हुए जेल अधीक्षक आलोक सिंह ने बताया कि सिंभावली थाना पुलिस ने आरोपी तारा चंद्रा और बाबू को ट्रांसफार्मर चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इन दोनों को बीते साल 17 दिसंबर को जेल लाया गया था। जेल में पहुंचने पर तारा ने अपना नाम बाबू और बाबू ने अपना नाम तारा बताया था। जेल अधीक्षक ने बताया कि, जेल में जब किसी आरोपी को लाया जाता है, तो उस समय सिर्फ न्यायालय का वारंट होता है। आरोपित के पास किसी तरह का पहचान-पत्र नहीं होता है। आरोपितों द्वारा दी जाने वाली जानकारी को ही रिकार्ड में दर्ज किया जाता है।
