How Assam got its Name: भारत की सेवन सिस्टर्स में से एक असम में आगामी विधानसभा चुनाव (Assembly Elections 2026) के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। असम विधानसभा चुनाव (Assam Assembly Election 2026) के लिए 9 अप्रैल, 2026 को एक ही चरण में वोटिंग होगी। वहीं, वोटों की गिनती और रिजल्ट की घोषणा 4 मई की जाएगी। असम भारत के पूर्वी छोर पर स्थित एक महत्वपूर्ण और बेहद खूबसूरत राज्य है, जो अपनी मनोहारी और शांत प्राकृतिक छटा के लिए जाना जाता है। यहां दूर-दूर तक फैली हरियाली, सुंदर पहाड़ियां और जीवनदायिनी नदियों की लंबी श्रृंखला देखने को मिलती है, जिनमें प्रमुख हैं ब्रह्मपुत्र और बराक। प्राचीन समय से ही यह क्षेत्र अनेक जातियों, जनजातियों और सांस्कृतिक समुदायों का बसेरा रहा है। विभिन्न नस्लों और परंपराओं के मेल-मिलाप ने यहां एक जीवंत और समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को जन्म दिया है, जो असम को विशिष्ट और गौरवशाली बनाती है। अब बात असम की हो तो ध्यान इसके नाम पर भी जाता है। बता दें कि, असम का इतिहास हजारों साल पुराना माना जाता है। तो ऐसे में आइए जानें असम का पुराना नाम क्या था?
कैसे पड़ा असम का नाम?
प्रागज्योतिषपुर के नाम का अर्थ
असम सरकार की अधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, “असम” नाम की उत्पत्ति को लेकर विद्वानों के बीच अलग-अलग मत प्रचलित हैं। प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में इस क्षेत्र को मुख्य रूप से प्रागज्योतिष और कामरूप के नाम से जाना जाता था। इसकी ऐतिहासिक प्राचीनता का प्रमाण इस बात से मिलता है कि इसका उल्लेख महान महाकाव्यों महाभारत और रामायण के साथ-साथ विभिन्न पुराणों में भी मिलता है। “प्रज्योतिष” या “प्रागज्योतिषपुर” नाम की व्याख्या करते हुए विद्वानों ने बताया है कि ‘प्राग’ का अर्थ ‘पूर्व’ तथा ‘ज्योतिष’ का अर्थ ‘तारा’, ‘प्रकाश’ या ‘खगोलीय ज्ञान’ से जुड़ा है। इस आधार पर “प्रागज्योतिषपुर” का आशय “पूर्वी ज्योतिष का शहर” माना जाता है।
असम का प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर
कामरूप का पौराणिक संबंध
कामरूप का जिक्र सिर्फ साहित्यिक स्रोतों में ही नहीं, बल्कि अनेक प्राचीन शिलालेखों में भी मिलता है। इस नाम की उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक कथा देवी सती से संबंधित है, जिन्होंने अपने पिता दक्ष द्वारा उनके पति भगवान शिव का अपमान किए जाने पर यज्ञ में स्वयं को समर्पित कर दिया था। शोकाकुल भगवान शिव देवी सती के शरीर को लेकर पूरे ब्रह्मांड में घूमने लगे। तब सृष्टि की व्यवस्था बनाए रखने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के शरीर के कई भाग कर दिए, जो पृथ्वी के विभिन्न स्थानों पर गिरे। मान्यता है कि ऐसा ही एक अंग नीलाचल पहाड़ियां के पास गिरा, जहां आज प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर स्थित है और यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। हालांकि भगवान शिव की तपस्या जारी रही, इसलिए देवताओं ने प्रेम के देवता कामदेव को उनकी साधना भंग करने के लिए भेजा। कामदेव अपने लक्ष्य में सफल हुए, लेकिन क्रोधित भगवान शिव ने उन्हें भस्म कर दिया। बाद में कामदेव ने इसी भूमि पर पुनः अपना स्वरूप प्राप्त किया, जिसके कारण यह क्षेत्र “कामरूप” अर्थात वह स्थान जहां ‘काम’ ने अपना रूप पुनः पाया, के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
असम नाम की उत्पत्ति कैसे हुई?
इतिहासकारों के मुताबिक, ‘अहम’ या ‘असम’ नाम के बारे में माना जाता है कि इसका संबंध उन अहोम शासकों से है, जो वर्ष 1228 ईस्वी के आसपास इस क्षेत्र में आए थे। हालांकि, इस शब्द की सटीक उत्पत्ति स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह धारणा प्रचलित है कि वर्तमान “असम” नाम उसी का अंग्रेजी रूपांतरण है। अहोमों ने इस प्रदेश में प्रवेश कर लगभग छह शताब्दियों तक शासन किया और उनका काल असम के इतिहास में एक स्वर्णिम युग के रूप में देखा जाता है। अहोम राजवंश की स्थापना शान वंश के राजकुमार सुकाफा ने की थी, जो पटकाई पर्वत को पार करके इस भूभाग में पहुंचे थे। 13वीं से 19वीं शताब्दी के बीच अनेक आदिवासी समुदाय भी असम के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य का हिस्सा बने, जिनमें कछारी और कोच प्रमुख थे। इस राजवंश का शासन तब समाप्त हुआ जब बर्मी आक्रमणों के बाद 1826 में यंदाबू की संधि हुई और इसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने असम को अपने अधीन कर लिया। इसके साथ ही ब्रिटिश शासन की शुरुआत हुई और राज्य के इतिहास में औपनिवेशिक काल का नया अध्याय खुला।
आजादी तक ऐसा रहा असम का सफर
समय के साथ असम का भौगोलिक स्वरूप बदलता गया और इसकी सीमाओं के भीतर से कई नए राज्यों के गठन के कारण इसका बड़ा हिस्सा अलग हो गया। ब्रिटिश शासन के दौरान 1832 में कछार और 1835 में जयंतिया पहाड़ियों को अपने अधिकार में ले लिया गया। बाद में 1874 में असम को एक अलग प्रांत का दर्जा दिया गया, जिसकी राजधानी शिलांग बनाई गई। साल 1947 में भारत के विभाजन के समय सिलहट जिले (करीमगंज उपखंड को छोड़कर) को पूर्वी बंगाल में मिला दिया गया, जो उस समय पाकिस्तान का हिस्सा बना और बाद में बांग्लादेश के रूप में स्वतंत्र राष्ट्र बना। हालांकि, देश के अन्य राज्यों की तरह असम ने भी विभिन्न स्वतंत्रता आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी निभाई और राष्ट्रीय संघर्ष में महत्वपूर्ण योगदान दिया। असम आज मुख्य रूप से अपने विश्व प्रसिद्ध चाय के बागानों, काजीरंगा नेशनल पार्क (UNESCO विश्व धरोहर स्थल) के एक सींग वाले गैंडे और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। शहर (Cities News in Hindi) अपडेट और ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।
