फर्ज करें आप आज वीकेंड मनाने के लिए दिल्ली से नैनीताल जा रहे हैं। गाड़ी के एक्सलरेटर पर पांव रखा और आपकी गाड़ी देखते ही देखते 80-90 की रफ्तार से फर्राटा मारने लगी और फिर अचानक डासना टोल प्लाजा पर आपको ब्रेक लगाना पड़ गया। यहां टोल चुकाकर आगे बढ़ और अभी आपने फर्राटा मारते हुए सफर का आनंद लेना शुरू ही किया था कि गढ़ मुक्तेश्वर के टोल प्लाजा ने आपकी रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। टोल प्लाजा पर सिर्फ आपका पैसा ही नहीं कटता, बल्कि सब्र का भी इम्तिहान होता है। क्योंकि कई टोल प्लाजा पर लंबी-लंबी कतारों में कई मिनट बर्बाद होते हैं। लेकिन जल्द ही आपकी यह समस्या गुजरे जमाने की बात हो जाएगी। स्वयं सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसकी जानकारी दी है।
अब टोल प्लाजा पर नहीं लगेंगी लंबी-लंबी कतारें
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कल यानी गुरुवार 4 दिसंबर को ही घोषणा की कि अगले एक साल में टोल प्लाजा से टोल वसूली खत्म हो जाएगी। एक नया इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम मौजूदा टोल प्लाजा की जगह लेगा। नए इलेक्ट्रॉनिक टोल वसूली सिस्टम की खास बात यह होगी कि यह आपकी रफ्तार पर ब्रेक नहीं लगाएगा और न ही आपको टोल चुकाने के लिए कतार में खड़ा रहना पड़ेगा। इस नए टोल सिस्टम से हाईवे पर आपका एक्सपीरियंस कई गुना बढ़ जाएगा।
नितिन गडकरी ने लोकसभा में प्रश्न काल के दौरान बोलते हुए कहा, नया सिस्टम 10 जगहों पर पहले ही काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि यही सिस्टम अब पूरे देश में लागू किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने सदन को जानकारी दी कि अभ पूरे देश में 10 लाख करोड़ की लागत के 4500 हाइवे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।
ताजा आधिकारिक बयान के मुताबिक नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (NETC) प्रोग्राम बनाया है। NETC देशभर के हाईवेज में टोल भगुतान को सुगम बनाने वाला इंटरऑपरेबल प्लेटफॉर्म है। इस नई टोल वसूली प्रणाली के केंद्र में भी FASTag ही है। बता दें कि FASTag एक RFID आधारित डिवाइस है, जिसे गाड़ियों की विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है। यह यूजर के अकाउंट से जुड़ी रहती है और टोल प्लाजा पर बिना रुके ही टोल भुगतान में मदद करती है।
ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन
टोल प्लाजा पर लगे हाई परफॉर्मेंस कैमरा सामने से आती आपकी गाड़ी की नंबर प्लेट की तस्वीर लेतती है। ANPR टेक्नोलॉजी के जरिए यह गाड़ी की लाइसेंस नंबर प्लेट को रीड करती है। फिर इस इंफॉर्मेशन का इस्तेमाल करके यह गाड़ी की पहचान करती है और गाड़ी पर मौजूद FASTag से टोल वसूली में मदद करती है। यह सिस्टम FASTag के साथ काम करता है।
ग्लोबल नेवीगेशन सैटेलाइट सिस्टम
GNSS आधारित टोलिंग सिस्टम आपकी गाड़ी की मूवमेंट की जानकारी के लिए सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती है। इस सिस्टम की खास बात यह है कि यह उतने ही हिस्से का टोल वसूल करेगी, जितने पर आपने हाईवे का इस्तेमाल किया। मौजूदा प्रणाली की तरह इसमें फिक्स टोल नहीं होगा। कुछ नए जीपीएस सिस्टम तो बिना किसी चार्ज के डेली टोल फ्री ट्रैवेल डिस्टेंस की सुविधा भी देते हैं, जिसके तहत आप बिना टोल चुकाए 20 किमी तक का सफर कर सकते हैं।
दोनों तकनीकों का संगम
ANPR-FASTag आधारित, बिना बैरियर का टोलिंग सिस्टम दोनों तकनीकों को एक साथ मिलाकर काम करता है। यह सिस्टम वाहन की पहचान के साथ ही टोल प्लाजा पर व्यक्तिगत रूप से रुके बिना टोल वसूली में मदद करता है। जिन गाड़ियों पर FASTag नहीं होगा या नंबर प्लेट मौजूद नहीं होगी, उन्हें ई-नोटिस बेजा जाएगा और पैनल्टी भी लग सकती है।
