Faridabad: दिल्ली से सटा फरीदाबाद औद्योगिक नगरी होने के साथ ऐतिहासिक नगरी भी है। इतिहास भी ऐसा जो सदियों नहीं बल्कि युगों पुराना है। यह धरती महाभारत काल में पांडवों से जुड़ी रह चुकी है। साथ ही भारत की आजादी में भी यह धरती कई शूरवीरों के आगमन के साक्ष्य रह चुकी है। इस जिले में करीब 50 गांव है, लेकिन यमुना नदी के किनारे बसे ‘तिलपल’ गांव का ऐतिहासिक महत्व है।
तिलपत गांव का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि महाभारत काल में पांडवों ने दुर्योधन से जो पांच गांव मांगे थे, उनमें एक तिलपत गांव भी था। इसलिए इस गांव में पांडवों की भी पूजा की जाती है। वहीं, इस गांव में भगवान कृष्ण के भक्त संत बाबा सूरदास तिलपल गांव आए थे। उस समय गांव के पुरुषों की जल्दी मौत हो जाती थी। बाबा सूरदास ने जवान विधवा महिलाओं को देख कर गांव के लोगों को ‘श्री राधा वल्लभ, श्री हरि वंश, श्री वृदांवन श्री मनचंद’ मंत्र का बार बार स्मरण करने को कहा। जिसके बाद यह गांव सुखी व संपन्न हो गया। इस गांव में आज भी हर घर इस मंत्र का जाप किया जाता है। संत सूरदास ने जब प्राण छोड़े तो अंतिम संस्कार के बाद लोग उनकी राख गांव में ले आए और यहां पर समाधि स्थल बनाई। जहां पर अब भी हर मंगलवार को मेला लगता है।
जाटों व औरंगजेब के बीच युद्ध का तिलपत गवाह
तिलपत गांव बड़े युद्ध का भी गवाह रह चुका है। यहां पर 10 मई 1666 को जाटों व औरंगजेब की सेना के बीच भीषण लड़ाई हुई। इस युद्ध में जाटों की विजय हुई। हालांकि इसके बाद मुगल शासक ने सेना को संगठित किया और फिर से युद्ध हुआ। इस युद्ध में किसान और जाट हार गए और इस जाटों के नायक गोकुला को बंदी बना लिया गया। औरंगजेब ने जनता को आतंकित करने के लिये गोकुला का 1 जनवरी 1670 को आगरा के किले पर टुकडे़-टुकड़े कर मार दिया। गोकुला के बलिदान से मुगल शासन के खात्मे की शुरुआत हुई।
बाबा फरीद ने बसाया इस शहर को
इतिहास के अनुसार इस शहर को ‘बाबा फरीद’ ने सन 1607 ई. में बसाया। इनके नाम पर ही जिले को फरीदाबाद नाम मिला। बाबा फरीद जहांगीर के खजांची थे। इस शहर को बसाने का मकसद यहां से गुजरने वाले राजमार्ग पर यात्रियों की रक्षा करना था। फरीद ने यहां एक किला, एक तालाब व एक मस्जिद बनवाया था, फिर धीरे-धीरे शहर बसता गया। बाबा फरीद का ओल्ड फरीदाबाद में स्मारक स्थित है। कहा जाता है कि बाबा फरीद ने ही फरीदाबाद नगरी को बसाया था। इसके प्रति स्थानीय लोगों में बड़ी श्रद्धा है। बाबा फरीद के मकबरे के संगमरमर से बने दो विशाल द्वार हैं। पूर्वी दरवाजे को नूरी दरवाजा और उत्तरी दरवाजे बहिश्ती दरवाजा कहा जाता है। मकबरे के अन्दर संगमरमर की दो गुफायें हैं।
