Shiva Temple in Faridabad: इस शिवलिंग को पांडवों ने किया था स्थापित, सभी धर्म में फैली इसकी ख्‍याति

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Feb 17, 2023, 02:05 PM IST

Shiva Temple in Faridabad: अजरौंदा में स्थित प्राचीन शिव मंदिर का नाता महाभारत काल से है। मान्‍यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इस मंदिर की स्‍थापना कर यहां पर पूजा-अर्चना की थी। इस मंदिर की मान्‍यता ऐसी है कि यहां पर हिन्दू के साथ मुस्लिम धर्म के लोग भी आकर माथा टेकते हैं। महाशिवरात्रि पर यहां मेले और विशाल भंडारे का आयोजन हो रहा है।

KEY HIGHLIGHTS
  • अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने किया था इस मंदिर की स्‍थापना
  • अजुर्न के नाम पर इस गांव का नाम पड़ा अजरौंदा
  • इस मंदिर में मन्‍नत मांगने वाला भक्‍त खाली हाथ नहीं रहता


Shiva Temple in Faridabad: महाशिवरात्रि का पर्व कल है। महाशिवरात्रि का पर्व फरीदाबाद में भी बड़े ही धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। महाशिवरात्रि को लेकर यहां के शिव मंदिर और शिवालय सजने लगे हैं। कल सुबह शुभ मुहूर्त के साथ भगवान शिव के जलाभिषेक और श्रृंगार के लिए मंदिरों के कपाट खुल जाएगा। इस शहर में कई ऐसे मंदिर हैं जो बहुत प्राचीन और ऐतिहासिक हैं। इनमें से ही एक है मथुरा रोड के गांव अजरौंदा में स्थित प्राचीन शिव मंदिर। इसका नाता महाभारत काल से है। मान्‍यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इस मंदिर की स्‍थापना एक ही दिन में किया था। इस मंदिर की मान्‍यता ऐसी है कि यहां पर हिन्दू के साथ मुस्लिम धर्म के लोग भी आकर माथा टेकते हैं।

Shiva Temple in Faridabad

प्राचीन शिवलिंग

इस मंदिर की मान्‍यता दूर-दूर तक फैली हुई है। महाशिवरात्रि पर यहां सुबह से ही भक्‍तों की भीड़ लग जाता है। इस मंदिर में सिद्धपीठ मंदिर बनने के सभी गुण मौजूद हैं। इस मंदिर के इतिहास के बारे में बताते हुए पुजारी नितिन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना पांडवों ने हजारों साल पहले की थी। पांडवों जब अज्ञातवास में थे तो वे जहां रात रुकते थे वहां पर शिवलिंग की स्‍थापना कर पूजा करते थे। पांडव यहां पर कुछ दिन तक रूके थे। मान्‍यता है कि अर्जुन ने अपने तीर से पेड़ की डालियां काट यहां पर कुटिया बनाई थी। जिसकी वजह से इस गांव का नाम अजरौंदा पड़ा। कहा जाता है कि इस प्राचीन शिव मंदिर में मन्‍नत मांगने वाला भक्‍त कभी खाली हाथ वापस नहीं जाता है। अब यहां शिवलिंग के साथ मंदिर में राम दरबार, राधा-कृष्ण, मां दुर्गा, लक्ष्मी नारायण, शीतला मां की मूर्ति भी स्थापित हो चुकी हैं।

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