उत्तर प्रदेश में रहते हैं तो अगले महीने यानी फरवरी में बिजली का बिल कुछ ज्यादा चुकाने के लिए तैयार रहें। जिन लोगों की सैलरी कल यानी 30 जनवरी को आने वाली है, वह बिजली के बिल के लिए जितना पैसा बचाकर रखते हैं, उससे कुछ ज्यादा बचाएं। क्योंकि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने फरवरी में 10 फीसद ईंधन अधिभार शुल्क यानी Fuel Surcharge लगाने की घोषणा की है। FPPAS अधिसूचना के अनुसार नवंबर 2025 में ईंधन लागत में हुए बदलाव को एडजस्ट करने के लिए बिजली के बिलों पर 10 फीसद सरचार्ज लगाया है।
यूपी में अगले महीने ज्यादा आएगा बिजली का बिल
एक महीने में की जाने वाली इस वसूली से राज्य के आप जैसे बिजली उपभोक्ताओं पर लगभग 616 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ने का अनुमान है। फरवरी के बिल में आने वाला यह सरचार्ज अब तक का सबसे ज्यादा FPPAS है। इससे पहले दूसरा सबसे बड़ा सरचार्ज दिसंबर 2025 में 5.56 प्रतिशत के रूप में लगाया गया था, जो सितंबर 2025 की ईंधन लागत में वृद्धि के एडजस्टमेंट के लिए था।
बता दें कि सितंबर 2025 में राज्य में बिजली की रिकॉर्ड मांग 30,255 मेगावाट दर्ज की गई थी। उस समय निगम ने औसतन 4.88 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी थी। इसके विपरीत नवंबर 2025 में मांग घटकर 19,341 मेगावाट रह गई, लेकिन बिजली की खरीद दर बढ़कर 5.79 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गई।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार 10 फीसद सरजार्ज लगाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए UPPCL के अध्यक्ष आशीष कुमार गोयल ने कहा कि फ्यूल सरचार्ज पूरी तरह स्वचालित प्रक्रिया के तहत लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि कोयला कंपनियां जो भी दर वसूलती हैं, वही सरचार्ज गणना का आधार बनती है। इसी तरह, कोयले से बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों की लागत भी स्वतः निगम पर आ जाती है। गोयल ने स्पष्ट किया कि इस गणना के लिए एक स्पष्ट और परिभाषित फार्मूला है, जिसे उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने मंजूरी दी हुई है।
फरवरी में 10 फीसद लगेगा सरचार्ज
उन्होंने बताया कि एफपीपीए सरचार्ज हमेशा एक-दो महीने की देरी से लागू होता है, यानी वर्तमान में लागू दर दो महीने पहले प्राप्त कोयले की लागत के आंकड़ों पर आधारित होती है। उस बिलिंग साइकल में कोयले की कीमत ज्यादा होने के कारण सरचार्ज 10 प्रतिशत तक पहुंच गया है। गोयल के अनुसार, NTPC, UPPCL के अपने बिजली संयंत्र और भविष्य की परियोजनाएं सभी कोयला इंडिया या अन्य अधिकृत स्रोतों से ही कोयला खरीदते हैं और उपभोक्ताओं से ली जाने वाली हर टैरिफ राशि रेगुलेटरी कमीशन से अप्रूव होती है।
