मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रोहतास ग्रुप पर ईडी का शिकंजा, 350 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति अटैच

ईडी की लखनऊ जोनल टीम ने रोहतास ग्रुप की 75 अचल और 2 चल संपत्तियों को अटैच किया है। ये संपत्तियां रोहतास ग्रुप के प्रमोटर दीपक रस्तोगी, ग्रुप की सहयोगी कंपनियों, वर्दान टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड, आध्याये रियल्टी इंफ्रास्ट्रक्चर एलएलपी और कई बेनामी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज पाई गईं।

उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट से जुड़े एक बड़े घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रोहतास ग्रुप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 के तहत ईडी ने रोहतास ग्रुप से जुड़ी 158.85 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा बाजार मूल्य के हिसाब से इन संपत्तियों की कीमत 350 करोड़ रुपये से अधिक है।

ED Raid

ईडी की छापेमारी

ईडी की लखनऊ जोनल टीम ने की कार्रवाई

यह कार्रवाई ईडी की लखनऊ जोनल टीम ने की है, जिसमें कुल 75 अचल और 2 चल संपत्तियां शामिल हैं। अटैच की गई अचल संपत्तियों की बुक वैल्यू करीब 141.21 करोड़ रुपये बताई गई है। ये संपत्तियां रोहतास ग्रुप के प्रमोटर दीपक रस्तोगी, ग्रुप की सहयोगी कंपनियों, वर्दान टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड, आध्याये रियल्टी इंफ्रास्ट्रक्चर एलएलपी और कई बेनामी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज पाई गईं। इसके अलावा 17.64 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां हाईनेस इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर मिली हैं। सभी अटैच की गई संपत्तियां लखनऊ में स्थित हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस की एफआईआर से शुरू हुई थी जांच

ईडी की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज 83 एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। जांच में सामने आया कि रोहतास प्रोजेक्ट लिमिटेड ने ‘सुल्तानपुर रोड प्रोजेक्ट’, ‘रायबरेली रोड प्रोजेक्ट’ और ‘रोहतास प्लूमेरिया’ के नाम से कई टाउनशिप योजनाएं लॉन्च की थीं। इन योजनाओं के तहत निवेशकों को 30 महीने के भीतर प्लॉट या फ्लैट का कब्जा देने, या फिर बुकिंग राशि का 150 फीसदी लौटाने का वादा किया गया था।

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