अहिल्यानगर : “एडवांस्ड आर्मर्ड व्हीकल (ट्रैक्ड और व्हील्ड)” का डिजाइन और विकास व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (VRDE) द्वारा तैयार किया गया है, जो रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की एक प्रमुख अनुसंधान इकाई है। इन armoured व्हीकल को 25 अप्रैल 2026 को अहिल्यानगर स्थित VRDE में आयोजित कार्यक्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा DRDO के अध्यक्ष डॉ. एस. वी. कामत द्वारा पेश किया गया। AAP (ट्रैक्ड और व्हील्ड) को भारतीय सशस्त्र बलों की उभरती परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
अहिल्यानगर में स्वदेशी उन्नत armoured vehicle
ये इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल और आर्मर्ड पर्सनल कैरियर की भूमिकाओं को पूरा करने में सक्षम हैं। दोनों में स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित 30 मिमी क्रूलेस टर्रेट लगाया गया है। ये व्हीकल गतिशीलता, मारक क्षमता और सुरक्षा की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उन्नत सुविधाओं से लैस हैं। उच्च क्षमता वाले इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ यह प्लेटफॉर्म बेहतर पावर-टू-वेट अनुपात, अधिक गति, ढलान और बाधाओं को पार करने की क्षमता प्रदान करता है।
इसमें STANAG स्तर 4 और 5 की सुरक्षा, मॉड्यूलर ब्लास्ट और बैलिस्टिक सुरक्षा चारों ओर उपलब्ध है। हाइड्रो जेट्स की सहायता से जल अवरोधों को पार करने की बेहतर क्षमता के साथ यह उभयचर (एम्फीबियस) भी है, जो इसे संचालन में लचीलापन प्रदान करता है। 30 मिमी क्रूलेस टर्रेट के साथ 7.62 मिमी PKT गन भी लगी है, जिसे एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल लॉन्च करने के लिए कॉन्फ़िगर किया गया है।
65% स्वदेशी सामग्री का उपयोग
इसका बेस डिजाइन कई भूमिकाओं के लिए कॉन्फ़िगर किए जाने की क्षमता रखता है। वर्तमान में इसमें लगभग 65% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसे भविष्य में 90% तक बढ़ाने की योजना है। इन armoured vehicle का निर्माण दो औद्योगिक साझेदारों—M/s TASL, पुणे और M/s BFL, पुणे—द्वारा किया गया है, जिन्हें कई MSME इकाइयों का सहयोग मिला है। इस सहयोग से विकसित हो रहे रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिली है।
इस कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) प्रतीक किशोर, डीएस एवं डीजी (ACE), डॉ. (सुश्री) चंद्रिका कौशिक, डीएस एवं डीजी (PC&SI), श्री सुकरण सिंह, सीईओ एवं एमडी, M/s TASL पुणे, श्री अमित कल्याणी, वाइस चेयरमैन एवं संयुक्त प्रबंध निदेशक, M/s BFL पुणे सहित उद्योग जगत के अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। ARDE, DMRL, HEMRL, CVRDE और R&DE (E) जैसी विभिन्न प्रयोगशालाओं के निदेशक और वैज्ञानिक भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
