उत्तराखंड: तीन साल के जश्न से निकली रोजगार की तीन गारंटी, संविदा कर्मियों के नियमितीकरण के लिए बनेगी ठोस नीति

उत्तराखंड में धामी सरकार का तीन साल पूरा हो गया है। इस मौके पर राजधानी देहरादून समेत राज्य के सभी जिलों में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

KEY HIGHLIGHTS
  • छात्रों-युवाओं पर फोकस, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण
  • दस करोड़ रूपये तक के सरकारी कार्य स्थानीय ठेकेदारों को ही
  • परेड ग्राउंड देहरादून में सेवा, सुशासन और विकास के तीन वर्ष पर मुख्य कार्यक्रम आयोजित

तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के मौके पर रविवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने छात्रों-युवाओं, उपनल और संविदाकर्मियों के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और स्नातक डिग्री प्राप्त युवाओं को राज्य सरकार आर्थिक सहायता देगी। एक समर्पित मंच के माध्यम से उनके रोजगारपरक कौशल को विकसित करने लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए, सरकार एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करेगी। उपनल एवं संविदाकर्मियों को नियमित नियुक्ति के लिए शीघ्र ही एक ठोस नीति तैयार की जाएगी। इसके अलावा, दस करोड़ रूपये तक के सरकारी कार्य प्रदेश के स्थानीय ठेकेदारों को ही दिए जाएंगे।

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उत्तराखंड सीएम पुष्कर सिंह धामी

परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री ने की घोषणाएं

सेवा, सुशासन और विकास के तीन वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ये घोषणाएं कीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की जोशपूर्ण उपस्थिति रही। मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में सबसे पहले उत्तराखण्ड के अमर बलिदानियों और सरदार भगत सिंह जी, राजगुरू जी और सुखदेव जी को शहीद दिवस पर भावांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड ने विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हुए सफलता प्राप्त की है। विभिन्न चुनौतियों के बावजूद इन तीन वर्षों में हमारे प्रदेश ने कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं और नए-नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिनकी गूंज आज पूरे देश में सुनाई दे रही है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ लोग जो बोलने में सावधानी नहीं रखते उनके कारण प्रदेश में कभी-कभी क्षेत्रवाद या जातिवाद की बातें सुनाई देती हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का कोई भी व्यक्ति यदि संकीर्ण क्षेत्रवाद या जातिवाद की बात करता है तो वो न केवल उन आंदोलनकारी के साथ अन्याय करता है, जिन्होंने इस प्रदेश के निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया बल्कि वो अपनी मातृ-भूमि के खिलाफ भी कार्य करता है।

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