दिल्ली के करीब सौ साल पुराने रेस कोर्स कैंप में चल रही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से करीब 700 परिवारों के सामने विस्थापन का खतरा पैदा हो गया है। इस कार्रवाई की चपेट में आजादी से पहले बनी एक ऐतिहासिक मस्जिद के आने की आशंका भी जताई जा रही है। बताया गया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने इस बस्ती की 53 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया है। इसके बाद यहां रहने वाले करीब 700 परिवारों के मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। इस पूरे मामले पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के एक प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को यहां दिल्ली वक्फ बोर्ड के अधिकारियों से मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपकर उनसे रेस कोर्स रोड स्थित मस्जिद एवं उससे सटे कब्रिस्तान के मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
रेस कोर्स कैंप में ध्वस्तीकरण
ऐतिहासिक मस्जिद पर भी संकट
रेस कोर्स कैंप में स्थित यह मस्जिद प्रधानमंत्री आवास से कुछ सौ मीटर की दूरी पर है। इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल पर भी ध्वस्तीकरण का खतरा मंडरा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति भी काट दी गई है। इससे मस्जिद के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
इस कार्रवाई ने एक ओर बड़ी संख्या में परिवारों के रहने के ठिकाने को लेकर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर आजादी से पहले के ऐतिहासिक धार्मिक स्थल के संरक्षण को लेकर भी चिंता पैदा कर दी है। हालांकि, मस्जिद को लेकर प्रशासन का आधिकारिक रुख और उसके भविष्य के संबंध में स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
एआईएमआईएम ने किया हस्ताक्षेप
एआईएमआईएम प्रतिनिधिमंडल ने बोर्ड से अपील की कि वह धार्मिक स्थल की सुरक्षा के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाए और तब तक किसी भी तरह की ध्वस्तीकरण कार्रवाई के खिलाफ अंतरिम सुरक्षा प्राप्त करे, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी की ओर से संबंधित रिकॉर्ड और कानूनी दावों की जांच न कर ली जाए।
बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में एआईएमआईएम की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष शोएब जमाई ने आठ सितंबर 1977 की दिल्ली गजट अधिसूचना का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इस अधिसूचना में उस जगह पर एक मस्जिद और कब्रिस्तान का जिक्र है, जो लगभग दो बीघा में फैली हुई है।
ज्ञापन में बोर्ड से आग्रह किया गया कि वह कथित विध्वंस की कार्यवाही की जांच करे और उसे चुनौती दे। एआईएमआईएम सदस्यों ने वक्फ बोर्ड कार्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि इस मामले पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का रवैया नकारात्मक है।
