दिल्ली पर राज करने वाले तुगलकों ने ऐसा कौन सा फैसला किया, जो 'तुगलकी फरमान' मुहावरा बन गया

तुगलकी फरमान के बारे में तो आप जानते ही होंगे। कोई भी ऐसा आदेश, जिसका कोई मतलब न हो, जिससे देश और समाज का भला होने की बजाय बुरा ही हो। जिसमें छोटे-बड़े, ऊंच-नींच का कोई फर्क न हो और जिसे देर-सबेर वापस लेने की जरूरत महसूस हो, उसे आमतौर पर तुगलकी फरमान कहा जाता है। चलिए जानते हैं ये तुगलकी फरमान मुहावरा आया कहां से -

फलां व्यक्ति ने तो तुगलकी फरमान सुना दिया। अजीबो-गरीब निर्णय लेने और उनको पालन कराने पर 'तुगलकी फरमान' मुहावरे का भरपूर इस्तेमाल होता है। कुछ भी अटपटा हो तो हर किसी की जुबां से तुरंत तुगलकी फरमान मुहावरा निकल आता है। आखिर यह तुगलकी फरमान है क्या? क्या इसका नाता एक समय दिल्ली पर राज करने वाले तुगलक वंश से है? अगर हां, तो फिर उन्होंने ऐसे क्या फैसले लिए या फरमान दिए, जिसके कारण तुगलकी फरमान एक मुहावरा बना गया। चलिए जानते हैं -

Tughlaqi Farman

कहां से आया तुगलकी फरमान मुहावरा

कहां इस्तेमाल होता है तुगलकी फरमान मुहावरा

जब भी किसी के किसी फैसले की आलोचना करनी हो या वह अटपटा लगे, उससे मानने का मन न हो तो तुरंत मुंह से 'तुगलकी फरमान' मुहावरा निकल पड़ता है। जब भी सरकार का, किसी नेता का, अधिकारी का या किसी भी उच्च पदस्थ का कोई फैसला देश या समाज के भले के लिए न होकर पूरी तरह से गलत महसूस हो तो उस फैसले की आलोचना के लिए हम और आप 'तुगलकी फरमान' मुहावरे का इस्तेमाल करते हैं।

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