क्या होता है Zero Mile, दिल्ली का जीरो माइल कहां है, यहां पढ़ें इसकी रोचक कहानी

Delhi Zero Mile: यात्रा के दौरान शहरों में प्रवेश करते हुए आपने सड़क के किनारे माइलस्टोन जरूर देखें होंगे। लेकिन क्या आपने कभी इसपर जीरो माइल लिखा देखा है। अगर नहीं तो ये खबर आपके लिए है। आज आपको जीरो माइल और दिल्ली के जीरो माइल के बारे में बताएंगें।

Delhi Zero Mile Stone: सड़क यात्रा करते हुए आपने जगह-जगह पर माइलस्टोन लगा हुआ देखा ही होगा। इन माइलस्टोन पर शहर और गांवों आदि की दूरी लिखी होती है, जिसके आधार पर आपको पता लगता है कि अभी आपको अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए और कितनी दूरी तय करनी होगी। लेकिन क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आपने किसी शहर की सीमा में प्रवेश किया हो और वहां माइलस्टोन पर शहर की दूरी 8-10 किमी लिखी हो। अगर हां, तो क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? क्यों माइलस्टोन पर शहर की दूरी जीरो नहीं लिखी गई है? और जीरो मील/किमी का माइलस्टोन होता भी है की नहीं। अगर होता है तो दिल्ली का माइलस्टोन कहां है? ऐसे अनगिनत सवाल हैं, जिनके जवाब लोगों को मालूम नहीं है। आज आपको जीरो माइलस्टोन के बारे में बताएंगें, जिससे आपकी सारी दुविधाएं दूर हो जाएंगी।

Delhi ZERO MILES

कहां है दिल्ली की जीरो माइल

क्या होता है जीरो माइल

बता दें कि हर शहर में एक जीरो माइल होता है। दिल्ली के जीरो माइल के बारे में जानने से पहले आपके लिए ये जानना आवश्यक है कि जीरो माइल आखिर होता क्या है। दरअसल, जीरो माइल किसी शहर या गांव की वो जगह होती है, जहां से अन्य शहरों और गांव की दूरी मापी जाती है। ये बॉर्डर से बॉर्डर तक की दूरी नहीं होती है। हर शहर/ गांव में एक ऐसा स्थान होता है, जहां से दूसरे स्थान की दूरी मापी जाती है। बता दें कि जीरो माइल को 1907 में जीटीएस यानी ग्रेट ट्रिग्नोमेट्री सर्वे के दौरान बनाया गया था। इस सर्वे का मुख्य मकसद पूरे भारत के सब कॉन्टिनेंट को मापना था। इसके बाद अब हर शहर का एक जीरो माइल होता है, जिसकी सहायता से अन्य शहरों की दूरी मापी जाती है।

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