Delhi News: दिल्ली और नोएडा के एक प्रमुख निजी अस्पताल में एमसीडी कर्मचारियों के कैशलेस इलाज के भुगतान में 9 करोड़ रुपये की संदिग्ध हेराफेरी सामने आने के बाद MCD ने भी इस मामले की जांच शुरू कर दी है। एमसीडी की जांच समिति ने 16 जुलाई को अपनी पहली बैठक कर अस्पताल से 2020 से लेकर अब तक हुए सभी डिजिटल और लिखित बातचीत की जानकारी मांगी है। जल्द ही दूसरी बैठक कर यह स्पष्ट किया जाएगा कि कहीं भुगतान प्रक्रिया में MCD के अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका तो नहीं है।
दिल्ली-नोएडा के निजी अस्पताल का मामला (सांकेतिक तस्वीर | Canva)
जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, MCD इस अस्पताल से जुड़े भुगतान मामलों की जांच के बाद अन्य निजी अस्पतालों को किए गए भुगतान का भी रिव्यू कर सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल जांच इस खास मामले तक सीमित है, जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि 9 करोड़ रुपये निजी खातों में ट्रांसफर होने के पीछे कहीं MCD के किसी अधिकारी या कर्मचारी का हाथ तो नहीं है।
ज इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब मार्च 2025 में उस निजी अस्पताल ने MCD से 74.90 लाख रुपये की बकाया राशि की मांग की। हालांकि जब अस्पताल के अधिकारी MCD कार्यालय पहुंचे तो पता चला कि यह राशि पहले ही भुगतान की जा चुकी थी। जागरण की रिपोर्ट कहती है कि जांच में यह खुलासा हुआ कि MCD ने बिल का भुगतान सीधे अस्पताल के बैंक खाते की बजाय निजी खातों में ट्रांसफर कर दिया था। इस भुगतान की प्रक्रिया अस्पताल के पूर्व कर्मचारियों के निजी ईमेल के माध्यम से हुई, क्योंकि आधिकारिक ईमेल सिस्टम काम नहीं कर रहा था।
MCD ने अपने सभी संबद्ध अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे अपने वित्तीय लेनदेन से जुड़े अधिकारियों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करें और ऐसे किसी भी कर्मचारी की सेवा समाप्त करने की जानकारी एमसीडी को दें, जिन पर संदेह हो।
इस घोटाले की जांच नोएडा पुलिस और साइबर क्राइम यूनिट कर रही है। जांच के दौरान अस्पताल के पूर्व कर्मचारी वैभव कुमार सहित अन्य एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया गया है। मामले की गहराई से पड़ताल जारी है और जल्द ही एमसीडी जांच समिति दूसरी बैठक कर आगे की कार्रवाई तय करेगी।
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