DMRC ने दिल्ली में खोद डाली एक और सुरंग, नई मेट्रो लाइन पर तेजी से चल रहा काम

दिल्ली मेट्रो ने सिर्फ साढ़े पांच महीने में ही दिल्ली के एक नए रूट पर लगभग एक किलोमीटर लंबी सुरंग बना दी है। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना आज बुधवार 21 अगस्त को टनल के ब्रेकथ्रू ईवेंट में शामिल हुए और उन्होंने इस अवसर पर दिल्ली मेट्रो की जमकर तारीफ की।

Delhi Metro: दिल्ली मेट्रो, दिल्लीवासियों के लिए लाइफलाइन और शान की सवारी है। हर रोज लाखों यात्री दिल्ली मेट्रो से सवारी करते हैं। कल यानी मंगलवार 20 अगस्त 2024 को दिल्ली मेट्रो में एक दिन में ही 76 लाख यात्रियों ने सवारी की। दिल्ली मेट्रो सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित नहीं है बल्कि NCR के अन्य शहरों जैसे नोएडा (Noida), गाजियाबाद (Ghaziabad), फरीदाबाद (Faridabad) और गुरुग्राम (Gurugram) के साथ ही बल्लभगढ़ और बहादुरगढ़ को भी जोड़ती है। दिल्ली मेट्रो का लगातार विस्तार हो रहा है और इसी कड़ी में DMRC ने आज यानी बुधवार 21 अगस्त को एक नए रूट की प्रमुख टनल का ब्रेकथ्रू ईवेंट किया। चलिए जानते हैं इस बारे में और विस्तार से -

Delhi-Metro_Tunnel

दिल्ली मेट्रो ने बनाई नई सुरंग

5 महीने में बना डाली सुरंग

दिल्ली मेट्रो ने सिर्फ साढ़े मांच महीने में ही 865 मीटर लंबी सुरंग बना डाली है। बता दें कि यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने यह सुरंग छतरपुर और छतरपुर मंदिर स्टेशन के बीच बनाई है। बुधवार 21 अगस्त को इसका ब्रेकथ्रू ईवेंट किया गया। यानी आज सुरंग एक ओर से दूसरे छोर पर निकल आई। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना (LG VK Saxena) और परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत (Transport Minister Kailash Gahlot) इस ब्रेकथ्रू ईवेंट में शामिल हुए।

किस लाइन पर बनी नई सुरंग

छतरपुर और छतरपुर मंदिर के बीच जिस नए मेट्रो रूट पर यह सुरंग बनाई गई है, उसे एयरोसिटी से तुगलकाबाद के बीच बनाया जा रहा है। यह लाइन कश्मीरी गेट से राजा नाहर सिंह कॉरिडोर (वॉयलेट लाइन) को एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन से जोड़ेगी। इस रूट पर कुल 15 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इस रूट के बन जाने से दिल्ली मेट्रो, दक्षिण दिल्ली के उन इलाकों में भी पहुंच जाएगी, जहां से मेट्रो अब तक दूर है।

23.62 किलो मीटर लंबी इस लाइन को गोल्डन कलर कोड दिया गया है, यानी इस रूट पर चलने वाली मेट्रो को गोल्डन लाइन (Golden Line) कहा जाएगा। हालांकि, शुरुआत में इसे सिल्वर कोड दिया गया था, लेकिन मेट्रो ट्रेनों के रंग की वजह से सिल्वर कोड की विजिब्लिटी कम होने के कारण बाद में इसे गोल्डन कलर कोड दिया गया। बता दें कि गोल्डन लाइन मेट्रो के फेस-4 का हिस्सा है।

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