दिल्ली के चिड़ियाघर, नेशनल जूलॉजिकल पार्क में 29 साल के अफ्रीकी हाथी शंकर की मौत ने सबको हैरानी में डाल दिया। शंकर की मौत एक्यूट कार्डियक फेलियर से हुई। प्रारंभिक जांच में उसके दिल में खून का थक्का जमने की पुष्टि हुई है। हालांकि अंतिम कारण की जानकारी भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) बरेली की विस्तृत रिपोर्ट से ही सामने आएगी।
दिल में खून का थक्का जमने से हुई शंकर की मौत (सांकेतिक तस्वीर)
पोस्टमार्टम और जांच जारी
शंकर का पोस्टमार्टम आईवीआरआई बरेली की टीम, स्वास्थ्य परामर्श समिति और पर्यावरण मंत्रालय के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में किया गया। वन्यजीव विभाग के नोडल इंचार्ज अभिजीत पावड़े ने बताया कि शुरुआती जांच में हाथी के दिल में थक्का मिला है। फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि यह थक्का बैक्टीरियल संक्रमण के कारण बना या किसी शॉक की वजह से।
मौत से पहले दिखे थे लक्षण
चिड़ियाघर कर्मचारियों के अनुसार, शंकर ने अपनी मौत से दो दिन पहले खाना लगभग छोड़ दिया था। 17 सितंबर की दोपहर उसने सामान्य से कम घास-पत्ते खाए, हालांकि फल और सब्जियां उसने ली थीं। हल्के दस्त की शिकायत भी देखी गई थी। उसी दिन शाम को वह अचानक शेड में गिर पड़ा और आपात उपचार के बावजूद रात आठ बजे उसकी मौत हो गई।
1998 में जिम्बाब्वे से आया था शंकर
शंकर को नवंबर 1998 में जिम्बाब्वे से दिल्ली लाया गया था। वह लंबे समय से चिड़ियाघर का आकर्षण केंद्र था। 2001 में उसकी साथी मादा हाथी ‘बंबई’ की मृत्यु के बाद शंकर अकेला हो गया था। इसी कारण उसका व्यवहार धीरे-धीरे आक्रामक होता गया।
हाईकोर्ट का आदेश और अधूरी योजना
जुलाई 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट ने शंकर के लिए एक मादा साथी लाने का आदेश दिया था लेकिन यह योजना अब तक अमल में नहीं लाई जा सकी। उसकी असामयिक मौत ने इस योजना को अधूरा छोड़ दिया।
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