मानहानि केस में मेधा पाटेकर की गिरफ्तारी के बाद कोर्ट ने दिए रिहाई के आदेश, जानें क्या है 24 साल पुराना यह मामला

Delhi News: नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटेकर को दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी एक डिफेमेशन (मानहानि) मामले में की गई है। जिसके बाद साकेट कोर्ट प्रोबेशन बांड और मुआवजा राशि भरने के बाद उनकी रिहाई का आदेश दे दिया है। एलजी वीके सक्सेना ने 2001 में यह मामला दर्ज कराया था।

Delhi News: दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना की मानहानि केस में सामाजिक कार्यकर्ता और नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटेकर को आज गिरफ्तार किया गया। जिसके बाद उन्हें साकेट कोर्ट में पेश किया गया। साकेत कोर्ट ने प्रोबेशन बांड और मुआवजा राशि भरने के बाद मेधा पाटेकर की रिहाई का आदेश दिया है। मेधा पाटेकर के खिलाफ कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी किया था। जिसके बाद शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि के मामले में दोषसिद्धि के बाद की गई है। यह मामला दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 2001 में दर्ज कराया था।

Medha Patkar

मेधा पाटकर (फाइल फोटो)

कोर्ट में 3 मई को होगी अगली सुनवाई

साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने कहा था कि मेधा पाटकर अदालत में उपस्थित नहीं हुईं और उन्होंने जानबूझकर सजा से जुड़े आदेश का पालन नहीं किया। पाटकर की मंशा स्पष्ट रूप से अदालत के आदेश की अवहेलना करने और सुनवाई से बचने की थी। चूंकि सजा पर कोई स्थगन आदेश मौजूद नहीं है, इसलिए कोर्ट ने कहा कि पाटकर को पेश कराने के लिए अब दबाव का सहारा लेना अनिवार्य हो गया है। अगली तारीख के लिए दोषी मेधा पाटकर के खिलाफ दिल्ली पुलिस आयुक्त के कार्यालय के माध्यम से गैर-जमानती वारंट जारी किया जाए। इस मामले पर अगली सुनवाई तीन मई को होगी।

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