घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी पड़ी भारी, तिरुपति बिल्डर के पूर्व निदेशक की 182 साल की सजा बरकार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने तिरुपति बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व निदेशक राजेंद्र मित्तल द्वारा घर खरीदारों से धोखाधड़ी के मामले में सजा में संशोधन की याचिका को अस्वीकार कर दिया है। अदालत ने उपभोक्ता फोरम द्वारा निर्धारित 182 वर्षों की कारावास की सजा को उचित ठहराते हुए बरकरार रखा।

दिल्ली हाई कोर्ट ने तिरुपति बिल्डर प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व निदेशक राजेंद्र मित्तल की 182 वर्ष की सजा को बरकरार रखा है। उपभोक्ता फोरम ने 344 घर खरीदारों से धोखाधड़ी के आरोप में मित्तल को दोषी ठहराया था। प्रत्येक मामले में सुनाई गई सजा जोड़कर 182 वर्ष की अवधि बनी। मित्तल ने इस फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।

Delhi High Court (File Photo)

दिल्ली हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

दिल्ली हाई कोर्ट ने उपभोक्ता फोरम के अधिकारों की पुष्टि करते हुए कहा कि वह किसी मामले में कई जेल की सजाएं दे सकता है, खासकर जब ये जुर्माना न अदा करने के चलते दी जा रही हों। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मित्तल की सजा में संशोधन की याचिका को भी खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि दी गई सजा पूरी तरह वैध और लागू करने योग्य है।

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