Delhi News: इस्लामिक स्टेट (ISIS) से कथित रूप से जुड़े और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने के आरोप में गिरफ्तार मोहम्मद रिजवान अशरफ को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उसके जमानत आवेदन को खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से स्पष्ट है कि अशरफ और उसके दो अन्य सहयोगी ISIS के सक्रिय सदस्य हैं और संगठन की विचारधारा का प्रचार कर रहे थे।
कोर्ट ने खारिज की जमानत संबंधी याचिका (प्रतीकात्मक तस्वीर | Canva)
दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष के पास ऐसे पर्याप्त सबूत हैं जो दर्शाते हैं कि अशरफ न केवल आतंकवादी संगठन के लिए युवाओं की भर्ती कर रहा था, बल्कि हथियार और विस्फोटक सामग्री की मुहैया कराने जैसे गंभीर अपराधों में भी संलिप्त था।
मोहम्मद रिजवान अशरफ को एक अक्टूबर 2023 को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उसने कई बार अपनी हिरासत अवधि को लेकर निचली अदालत के आदेशों को चुनौती दी, लेकिन अदालतों ने उसकी दलीलों को लगातार खारिज कर दिया। 24 फरवरी 2024 को ट्रायल कोर्ट ने उसकी न्यायिक हिरासत को 25 दिन के लिए बढ़ाया और उसी दिन उसकी जमानत याचिका भी नामंजूर कर दी थी।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अशरफ के वकील ने तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट ने उसका व्यक्तिगत आकलन किए बिना ही हिरासत बढ़ा दी और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) यह साबित करने में विफल रही कि उसकी निरंतर हिरासत की आवश्यकता क्यों है। लेकिन हाई कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड दर्शाता है कि एनआईए द्वारा जांच प्रतिदिन के आधार पर सक्रिय रूप से की जा रही थी और जांच एजेंसी जरूरी साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया में थी।
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