बहू को साझा घर में रहने का अधिकार है, भले ही सास-ससुर ने बेटे को त्याग दिया हो: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा है कि विवाह के बाद किसी घर में रहने वाली महिला उस परिवार की सदस्य होती है और वह केवल इस आधार पर उस घर से नहीं निकाली जा सकती कि पति को उसके माता-पिता ने संपत्ति या घर से बेदखल कर दिया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मामले में कहा है कि विवाह के बाद घर में रहने वाली पत्नी परिवार की सदस्य होती है और पति को बाद में उसके माता-पिता द्वारा त्याग दिए जाने के बावजूद भी वह उस घर में रहने की हकदार है। न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने महिला की सास और दिवंगत ससुर की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। 16 अक्टूबर को पारित आदेश में, न्यायाधीश ने कहा कि उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना बहू को बेदखल नहीं किया जा सकता।

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