Delhi News: एक पिता के जीवन का सबसे सुखद और गर्व का समय वह होता है जब उसके बच्चे तरक्की कर आगे बढ़ते हैं। ऐसे ही एक पिता हैं, जिनका सीना उनकी बेटी की तरक्की से चौड़ा हो गया। ये कहानी एक ऐसे पिता की है जो दशकों से सुप्रीम कोर्ट में रसोइया के रूप में कार्यरत है। उन्होंने कई जजों और उनके परिवार के लिए खाना बनाया है। उन्हें इस काम से बहुत खुशी मिलती है। लेकिन इससे बड़ी खुशी उन्हें तब मिली जब उनकी बेटी ने लॉ कर उनका नाम रोशन करना शुरू किया। आज उनकी बेटी को सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और अन्य सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा सम्मानित किया गया है। अपने खाने से न्यायाधीशों को खुशी देने वाले इस पिता ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन उनकी बेटी को इन्हीं जजों द्वारा सम्मानित किया जाएगा। आइए आज आपको उनकी बेटी प्रज्ञा के बारे में बताएं।
सीजेआई ने सुप्रीम कोर्ट की कुक बेटी को सम्मानित किया
कौन है प्रज्ञा सामल
प्रज्ञा सामल एमिटी लॉ स्कूल से एलएलबी की शिक्षा प्राप्त कर रही है और हर साल मेरिट लिस्ट में अव्वल रहती हैं। आगे एलएलएम करने के लिए प्रज्ञा को किसी एक संस्थान से नहीं बल्कि विदेश की कई संस्थानों में प्रवेश के प्रस्ताव मिल रहे हैं। इतना ही नहीं उन्हें इन शैक्षणिक संस्थानों द्वारा स्कॉलरशिप भी प्रदान की गई है। बता दें कि प्रज्ञा को कोलंबिया लॉ स्कूल, शिकागो लॉ स्कूल, कैरी लॉ स्कूल, बर्कले लॉ स्कूल और मिशिगन लॉ स्कूल से प्रवेश प्रस्ताव मिला है। इसमें बर्कले द्वारा उन्हें 30,000 डॉलर और मिशिगन द्वारा 50,000 डॉलर की स्कॉलरशिप की पेशकश की गई है।
अच्छे ऑफर के साथ प्रज्ञा मिशिगन लॉ स्कूल के प्रस्ताव को स्वीकार करने की सोच रही हैं, क्योंकि मिशिगन द्वारा उन्हें अन्य संस्थानों के मुकाबले अच्छी स्कॉलरशिप दी जा रही है। एक अच्छे संस्थान के साथ बेहतर स्कॉलरशिप प्राप्त करने का मौका कोई क्यों ही छोड़ना चाहेगा। विदेश के बड़े संस्थानों के प्रवेश का प्रस्ताव पाने वाली और अपने लॉ स्कूल में हमेशा अव्वल रहने वाला प्रज्ञा शुरुआत से ही अपने पिता का नाम रोशन कर रही हैं। लेकिन उनके पिता के लिए सबसे अधिक गौरवान्वित समय वो रहा जब उनकी बेटी को सीजेआई और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों द्वारा सम्मानित किया जा रहा था।
सीजेआई ने किया सम्मानित
प्रज्ञा के पिता का नाम अजय सामल है। वह ओडिशा के जाजपुर जिले के सुनापाल गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने रसोइया के तौर पर 1990 के दशक में आदित्य बिड़ला समूह के साथ कार्य किया था। उसके बाद 1996 में उन्हें शीर्ष अदालत में रसोइया के रूप में कार्य करने का मौका मिला। उन्होंने न जाने कितने जजों के लिए रसोइया का काम किया है। ऐसे में उनकी बेटी का एलएलबी करना और एलएलएम के लिए विदेशी शैक्षणिक संस्थाओं से प्रवेश का प्रस्ताव प्राप्त करना सच में एक अविश्वसनीय क्षण है। प्रज्ञा की सफलता पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि "यह उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में काम का अवसर यहां के कर्मचारियों के बच्चों के लिए इतने अधिक अवसर ला सकता है।" बता दें कि प्रज्ञा की और उनके पिता की कड़ी मेहनत आज रंग ला रही है।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। शहर (Delhi News) अपडेट और चुनाव (Elections) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।
