Delhi News: दिल्ली-एनसीआर में इस बार कई सालों से पहली बार कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना है। ऐसे में राजधानी में सर्दी के मौसम से पहले बेघर और कमजोर लोगों की सुरक्षा को लेकर सेंटर फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट (CHD) ने दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) को पत्र लिखकर जल्द से जल्द कदम उठाने की मांग की है।
दिल्ली में बेघर लोगों की जान बचाने के लिए विंटर एक्शन प्लान की मांग (फोटो - ANI)
दिल्ली में ला नीना इफेक्ट के कारण पड़ेगी कड़ाके की ठंड
दिल्ली में बेघरों के लिए लंबे समय से काम कर रहे संस्थानों ने कहा है कि इस बार ला नीना इफेक्ट के चलते ठंड जल्दी आने की संभावना है। ला नीना एक प्राकृतिक घटना है। प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान ठंडा होने को ला नीना इफेक्ट कहा जाता है। इसके कारण भारत में मानसून के दौरान सामान्य से अधिक वर्षा होती है और सर्दियों में कड़ाके की ठंड पड़ती है। ला नीना इफेक्ट की स्थिति को देखते हुए ही सरकार को तुरंत कदम उठाने की जरूरत है, ताकि कोई भी व्यक्ति सड़कों पर ठंड से अपनी जान न गंवाए। आपको बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ही दिल्ली आश्रय शहरी सुधार बोर्ड का पदेन अध्यक्ष होता है।
15 नवंबर से पहले ही लागू हो विंटर एक्शन प्लान
सीएचडी के कार्यकारी निदेशक सुनील कुमार अलेडिया ने अपने पत्र में कहा है कि हर साल 15 नवंबर से 15 मार्च तक लागू होने वाला विंटर एक्शन प्लान इस बार पहले ही शुरू किया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर मौसम विभाग की चेतावनी सही साबित हुई, तो ठंड 15 नवंबर से पहले ही दस्तक दे देगी। उन्होंने पत्र में लिखा, अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो दिल्ली में हजारों बेघर लोगों को ठंड में खुले आसमान के नीचे सोने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। लेकिन अगर सरकार तैयारियां पूरी कर ले तो इस त्रासदी से बचा जा सकता है।
तुरंत ये कदम उठाए जाने की करी मांग
संगठन ने दिल्ली सरकार और डीयूएसआईबी से कई तत्काल उपायों की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि सरकार को बिना देरी किए रैन बसेरों को शुरू कर देना चाहिए और वहां पर्याप्त कंबल, गर्म कपड़े और हीटिंग व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
संगठन की तरफ से दिए गए सुझाव:
1. ठंड बढ़ने से पहले सड़कों पर रह रहे बेघर लोगों को खोजने और उन्हें नाइट शेल्टर तक पहुँचाने के लिए आउटरीच और रेस्क्यू टीमों को तैनात किया जाए।
2. स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं के बीच समन्वय मजबूत किया जाए ताकि ठंड से बीमारियों या मौत की घटनाएं न हों।
3. जन जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को नजदीकी रैन बसेरों और हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी जाए।
4. सभी मौजूदा शेल्टर होम्स की मरम्मत कर उनके हालात सुधारे जाएं।
नई तकनीक और निगरानी से सुधार की मांग
पत्र में सीएचडी ने सुझाव दिया है कि डीयूएसआईबी अपनी मोबाइल एप्लिकेशन को और प्रभावी बनाए, जिससे लोग रियल टाइम में आस-पास के शेल्टर होम की जानकारी पा सकें। इसके साथ ही 24×7 कंट्रोल रूम और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की सिफारिश की गई है, ताकि किसी भी शिकायत या आपात स्थिति पर तुरंत कार्रवाई हो सके। सीएचडी ने यह भी कहा कि अगर प्रशासन चाहे तो दिल्ली में किसी भी व्यक्ति को ठंड से मरने नहीं देना असंभव नहीं है। इसके लिए केवल समय पर और मानवीय दृष्टिकोण से अपनाने की जरूरत है।
मानवता और संवैधानिक जिम्मेदारी को लेकर उठाए सवाल
सुनील अलेडिया ने कहा कि हर साल दिल्ली में ही सैकड़ों लोग ठंड से मरते हैं, जबकि राजधानी के पास पर्याप्त संसाधन और ढांचे मौजूद हैं। अगर इस साल भी समय पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह केवल सरकारी नहीं बल्कि मानव समाज की असफलता होगी। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल मौसम का नहीं, बल्कि मानव अधिकारों और गरिमा की रक्षा से जुड़ा है। दिल्ली सरकार, पुलिस और मानवाधिकार आयोग को मिलकर काम करना चाहिए ताकि कोई भी बेघर व्यक्ति खुले आसमान के नीचे अपनी जान न गंवाए।
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