Delhi Riots: साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) के युवा अधिकारी अंकित शर्मा की नृशंस हत्या के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली पुलिस से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। अदालत यह आदेश निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए दो दोषियों, नाजिम और कासिम की ओर से दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए जारी किया। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने दोनों दोषियों की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। इसके साथ ही कोर्ट ने दोषियों की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने की याचिका पर भी जवाब तलब किया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 दिसंबर की तारीख तय की है।
दोषियों की याचिका पर हाईकोर्ट का नोटिस
'ट्रायल कोर्ट का फैसला टिकाऊ नहीं': वकील
अपीलकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने उच्च न्यायालय में तर्क दिया कि निचली अदालत द्वारा उन्हें दोषी ठहराया जाना कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। बचाव पक्ष ने दलील दी कि जांच के दौरान इस मामले में अभियुक्तों की औपचारिक शिनाख्त परेड (TIP) नहीं कराई गई थी। वकील ने कहा कि मुख्य गवाह के बयानों की पुष्टि किसी अन्य स्वतंत्र सामग्री या साक्ष्य से नहीं होती है। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता रजत नायर ने पीठ को बताया कि अभियोजन पक्ष भी निचली अदालत के उस फैसले के खिलाफ अपील दायर करेगा, जिसमें छह अन्य सह-आरोपियों को बरी कर दिया गया था।
निचली अदालत ने 31 जुलाई को सुनाया था ऐतिहासिक फैसला
इससे पहले, 31 जुलाई को कड़कड़डूमा स्थित ट्रायल कोर्ट ने पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 153A (शत्रुता बढ़ाना), 149 (गैरकानूनी सभा), 148 (घातक हथियारों से दंगा) और 147 के तहत दोषी ठहराया था। ट्रायल कोर्ट ने ताहिर हुसैन सहित पांचों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अभियोजन पक्ष ने आरोपियों द्वारा दिखाई गई बर्बरता का हवाला देते हुए मौत की सजा की मांग की थी, हालांकि अदालत ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' की श्रेणी से बाहर मानते हुए उम्रकैद दी।
25 फरवरी 2020 को क्या हुआ था?
यह पूरा मामला दयालपुर थाने में दर्ज FIR पर आधारित है, जो अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई थी। 25 फरवरी 2020 को IB में कार्यरत अंकित शर्मा दफ्तर से घर लौटे थे और शाम को किसी काम से बाहर निकले थे। जब वे देर तक वापस नहीं लौटे तो परिजनों ने तलाश शुरू की। स्थानीय लोगों ने बताया कि चांद बाग पुलिया के पास उग्र भीड़ ने उन पर हमला कर दिया है। कई घंटों बाद अंकित शर्मा का क्षत-विक्षत शव खजूरी खास इलाके के एक नाले से बरामद हुआ। शिकायत के अनुसार, ताहिर हुसैन के ठिकाने पर हमलावर इकट्ठे हुए थे, जिसके बाद इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम देकर शव को नाले में फेंक दिया गया था। फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध के दौरान भड़की सांप्रदायिक हिंसा में कुल 53 लोगों की जान गई थी।
