राष्ट्रीय राजधानी में पारा चढ़ने लगा है और गर्मी के मौसम को देखते हुए दिल्ली सरकार ने जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 'एक्शन मोड' अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की तैयारियों का जायजा लिया। इस बार सरकार का मुख्य फोकस उत्पादन बढ़ाने, टैंकरों की पारदर्शी निगरानी और शिकायतों के तेजी से समाधान पर है।
CM रेखा गुप्ता ने की समर एक्शन प्लान की समीक्षा (फाइल फोटो | PTI)
तकनीक से रुकेगी पानी की चोरी
इस साल दिल्ली सरकार ने टैंकर माफिया और पानी की कालाबाजारी पर लगाम कसने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। जल बोर्ड के सभी टैंकर अब GPS) से लैस होंगे। ड्राइवरों के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके माध्यम से उन्हें पानी की डिलीवरी के बाद फोटो अपलोड करनी होगी। इस पारदर्शी सिस्टम से अधिकारी और आम नागरिक, दोनों ही टैंकरों की रीयल-टाइम लोकेशन देख सकेंगे।
मांग और आपूर्ति के अंतर को पाटने की चुनौती
दिल्ली की करीब 2.5 करोड़ की आबादी के लिए रोजाना 1250 मिलियन गैलन (MGD) पानी की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान उत्पादन 1000 MGD के करीब है। इस 250 MGD के बड़े अंतर को कम करने के लिए मुख्यमंत्री ने सभी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स को अपनी पूरी क्षमता से काम करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, पाइपलाइनों के लीकेज को रोकने के लिए विशेष टीमों को तैनात किया गया है।
हर विधानसभा का अपना 'माइक्रो प्लान'
समर एक्शन प्लान की एक बड़ी विशेषता यह है कि इस बार दिल्ली की हर विधानसभा के लिए अलग-अलग रणनीति तैयार की गई है। संवेदनशील इलाकों और पानी की कमी वाली कॉलोनियों की पहचान कर टैंकरों के रूट और सप्लाई के घंटे तय किए गए हैं। वर्तमान में करीब 1000 टैंकर तैनात हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर 200 अतिरिक्त टैंकरों के साथ बढ़ाया जाएगा।
24x7 हेल्पलाइन नंबर जारी
पानी की मात्रा के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता पर भी सरकार सख्त है। शहर भर में पानी के नमूनों की जांच के लिए सैंपलिंग वाहनों की संख्या बढ़ाकर 18 कर दी गई है। जनता की शिकायतों के लिए 1916 और 1800117118 जैसे हेल्पलाइन नंबर चौबीसों घंटे सक्रिय रहेंगे। साथ ही, दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में 28 वॉटर इमरजेंसी सेंटर स्थापित किए गए हैं, जो आपात स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाएंगे।
