दिल्ली में बिजली खरीद लागत 31% बढ़ने के बावजूद सरकार का बड़ा दावा, उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा ज्यादा असर

दिल्ली में बिजली खरीद लागत में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बावजूद उपभोक्ताओं पर इसका असर सीमित रखने का दावा किया गया है। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि DERC ने औसतन केवल 2.4 प्रतिशत PPAC वृद्धि की अनुमति दी है, जबकि सब्सिडी पाने वाले उपभोक्ताओं पर इसका कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

Delhi News: दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (PPAC) कोई नई व्यवस्था नहीं है। यह बिजली कानूनों के तहत पहले से मौजूद एक प्रावधान है, जिसके जरिए बिजली कंपनियां ईंधन और बिजली खरीद की बढ़ी हुई लागत का समायोजन करती हैं। आशीष सूद ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और अन्य अंतरराष्ट्रीय कारणों से ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। इसके कारण पिछले एक महीने में बिजली खरीद की लागत लगभग 31 प्रतिशत बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी वृद्धि के बावजूद दिल्ली सरकार के प्रयासों से उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव बहुत कम रखा गया है। बिजली खरीद की लागत 31 प्रतिशत बढ़ने के बावजूद दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने औसतन केवल 2.4 प्रतिशत PPAC वृद्धि की अनुमति दी है।

Ashish Sood (File Photo)

आशीष सूद (फाइल फोटो)

सामान्य नियामक व्यवस्था

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि पहले PPAC की सीमा 31 मार्च तक 14.5 प्रतिशत थी, जिसे अब बढ़ाकर लगभग 17.5 से 17.9 प्रतिशत किया गया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार ने उपभोक्ताओं को बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों के पूरे बोझ से बचाने का प्रयास किया है। आशीष सूद ने कहा कि PPAC देशभर में लागू एक सामान्य नियामक व्यवस्था है और बिजली कानूनों के अनुसार इसका पालन किया जाता है। DERC का ताजा आदेश बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास है।

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