Datia By-election: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटना (Narottam Mishra Ticket Cut)भारतीय जनता पार्टी के लिए गले की फांस बनता नजर आ रहा है। पार्टी हाईकमान के इस चौंकाने वाले फैसले के बाद दतिया में भाजपा कार्यकर्ताओं (Datia BJP Protest) और नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। शुक्रवार को इस फैसले से नाराज हजारों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ता नेशनल हाईवे 44 पर उतर आए और चक्काजाम कर दिया।
नरोत्तम मिश्रा का पत्ता कटने से नाराज समर्थकों की नारेबाजी
हाइवे पर इकट्ठा हुए कार्यकर्ताओं ने अपनी ही पार्टी के फैसले के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस बड़े विरोध प्रदर्शन के कारण हाइवे पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया और देखते ही देखते सड़कों पर सैकड़ों वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। आम राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। माहौल की संवेदनशीलता को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, जो कार्यकर्ताओं को समझाने और जाम खुलवाने का प्रयास कर रहा है।
दतिया उपचुनाव में डॉ नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटे जाने के बाद भाजपा में विरोध तेज हो गया है। नाराजगी जताते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण समेत जिला संगठन के कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया। वहीं, भाजपा के सभी पार्षदों ने भी अपने पदों से इस्तीफा देकर पार्टी के फैसले के खिलाफ खुलकर विरोध दर्ज कराया।
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बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा
दरअसल, दतिया से कद्दावर नेता और क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे नरोत्तम मिश्रा को इस बार टिकट मिलने की पूरी उम्मीद थी। साल 2023 के चुनाव में भी वही पार्टी के चेहरा थे। लेकिन बीजेपी ने इस बार उनके दावे को दरकिनार करते हुए पार्टी के पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ता आशुतोष तिवारी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया। हालांकि, टिकट मिलने के बाद आशुतोष तिवारी ने बड़े नेताओं का आभार जताते हुए कहा था कि वे नरोत्तम मिश्रा के मार्गदर्शन में चुनाव लड़ेंगे, लेकिन जमीनी स्तर पर मिश्रा के समर्थक इस फैसले को पचा नहीं पा रहे हैं।
बांकीपुर विधानसभा सीट पर BJP का बड़ा दांव
दूसरी तरफ, इसी राजनीतिक हलचल के बीच बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर भी एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला। वहां बीजेपी के घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर अचानक चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि वे पारिवारिक कारणों से इस बार मैदान में नहीं उतर पाएंगे, लेकिन एक आम कार्यकर्ता के रूप में पार्टी की सेवा करते रहेंगे। बीजेपी के लिए एक ही दिन में दो अलग-अलग राज्यों से आई इन खबरों ने चुनावी रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी है।
