उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के तहत चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस कार्यक्रम में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना समेत शासन व पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। चयनित अभ्यर्थियों में पुलिस उपनिरीक्षक (गोपनीय), पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) और पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) के पदों पर पारदर्शी प्रक्रिया से चुने गए युवा शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सभी नवचयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
लखनऊ के लोकभवन में सीएम योगी
"अगले 6 महीनों में 1 लाख से ज्यादा सरकारी नौकरियां"
नियुक्तियों में पारदर्शिता का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में भर्ती प्रक्रिया में भारी विसंगतियां, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का बोलबाला था। उन्होने कहा कि 2017 से पहले नियुक्ति पत्र बांटने को लेकर हंगामा करने वालों से मैं यह कहना चाहता हूं, ध्यान दें, हम आज फिर नियुक्ति पत्र बांट रहे हैं और अगले छह महीनों में हम उत्तर प्रदेश में एक लाख से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी देने जा रहे हैं। पिछली सरकारों की 'बीमारू' सोच के कारण यूपी खुद बीमारू राज्य बन गया था। उन्होंने अपने ही लोगों को भर्ती आयोगों और बोर्डों में बिठाकर सिस्टम की विश्वसनीयता खत्म कर दी थी।
उन्होंने आगे कहा कि जब किसी अभ्यर्थी का चयन बिना किसी सिफारिश और लेन-देन के शुचितापूर्ण तरीके से होता है, तो यह सिर्फ एक परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरी शासन व्यवस्था और आम नागरिक के प्रति विश्वास का प्रतीक बनता है।
"माफिया का काफिला रुकवा देता था जज की गाड़ी"
प्रदेश की कानून-व्यवस्था में आए ऐतिहासिक बदलावों को रेखांकित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि एक समय था जब माफिया खुलेआम जीप पर सवार होकर असलहे लहराते थे। पहले स्थिति यह थी कि जब माफिया का काफिला निकलता था, तो न्यायपालिका के अधिकारियों के वाहनों को भी रोक दिया जाता था। आज स्थिति बदल चुकी है; कोई भी माफिया खुलेआम असलहा लहराकर नहीं घूम सकता और न ही उत्सवों से पहले उपद्रव करने का साहस कर सकता है। सीएम योगी ने कहा, "यूपी पुलिस के मॉडल की अब हर जगह चर्चा होती है। अब यूपी में दंगे नहीं होते। हम दंगे की मॉक ड्रिल कराते हैं ताकि लोग भूल न जाएं कि दंगा कैसा होता है और हमारा अभ्यास भी लगातार होता रहे।"
"बेटी को छेड़ा तो समझो अपने डेथ वारंट पर साइन कर रहे हो"
महिला सुरक्षा पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने अपराधियों को सीधा अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले अभिभावक अपनी बेटियों को प्रदेश से बाहर भेजकर पढ़ाने के लिए मजबूर थे, लेकिन आज स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि हमने उपद्रव ग्रस्त प्रदेश को उत्सवपूर्ण प्रदेश में बदला है। आज कोई राह चलती हुई बेटी को छेड़ने का दुस्साहस नहीं कर सकता। अगर कोई करेगा तो उसे अंजाम अच्छी तरह पता है— अगर कोई ऐसा दुस्साहस करेगा, तो समझिए वह अपने डेथ वारंट पर खुद साइन कर रहा है।
