भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐसी कहानी लिखी है, जो उम्मीद, मेहनत और बदलाव की मिसाल बन चुकी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र अंतर-एजेंसी समूह United Nations Inter-agency Group for Child Mortality Estimation (UNIGME) 2025 रिपोर्ट ने साफ किया है कि देश में बच्चों की मृत्यु दर में तेज और लगातार गिरावट आई है। आज भारत न सिर्फ अपने बच्चों को बेहतर जीवन दे रहा है, बल्कि बाल जीवित रहने (Child Survival) के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व भी कर रहा है।
(सांकेतिक फोटो-Istcok)
आंकड़ों में दिखती बड़ी जीत
रिपोर्ट के अनुसार
- नवजात मृत्यु दर 1990 में 57 से घटकर अब 17 रह गई है
- 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 127 से घटकर 27 पर आ गई है
ये आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं हैं, बल्कि लाखों परिवारों की खुशियों और सुरक्षित भविष्य की कहानी हैं। इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे कई प्रभावी योजनाओं और नीतियों की अहम भूमिका रही है। Universal Immunization Programme ने बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाया और टीकाकरण को देश के कोने-कोने तक पहुंचाया। Janani Suraksha Yojana (JSY) और Janani Shishu Suraksha Karyakram (JSSK) ने सुरक्षित प्रसव और नवजात देखभाल को मजबूत किया। साथ ही, Mission Indradhanush ने टीकाकरण अभियान को और तेज किया, जिससे ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक सुरक्षा पहुंची।
तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं का साथ
देशभर में विशेष नवजात देखभाल इकाइयों (SNCUs) की स्थापना ने गंभीर रूप से बीमार नवजातों को नई जिंदगी दी। वहीं, डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे eVIN और UWIN ने टीकाकरण को पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाया। इसके अलावा, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से गांव-गांव तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं, जिससे हर बच्चे तक इलाज और देखभाल सुनिश्चित हो रही है। जहां वैश्विक स्तर पर बाल मृत्यु दर में गिरावट की रफ्तार धीमी हो रही है, वहीं भारत लगातार तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
यह उपलब्धि दिखाती है कि सही नीति, मजबूत स्वास्थ्य ढांचा और जागरूकता मिलकर किसी भी देश की तस्वीर बदल सकते हैं। हालांकि भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है, लेकिन कुपोषण, संक्रमण और स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच जैसी चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। फिर भी, देश इन समस्याओं से निपटने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
