Punjab News: पंजाब पुलिस ने कपूरथला जिले में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जासूसी के आरोप में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। दोनों गिरफ्तार आरोपी पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स को भारतीय सेना से संबंधित अत्यंत गोपनीय और गुप्त सूचनाएं भेज रहे थे। पुलिस को मिली एक गुप्त जानकारी के आधार पर इस रैकेट का भंडाफोड़ किया गया। पकड़े गए लोग सीधे तौर पर पाकिस्तान को संवेदनशील सैन्य जानकारी पहुंचा रहे थे, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
पंजाब पुलिस ने किया जासूसी रैकेट का भंडाफोड़ (Photo- Canva)
पुलिस की टीम इन आरोपियों की गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी, जिसके बाद साक्ष्य जुटाकर इन्हें हिरासत में लिया गया। पुलिस की टीम पता लगाने में जुटी है कि इस जासूसी नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और उन्होंने अब तक कितनी महत्वपूर्ण जानकारी लीक की है। जल्द से जल्द गिरोह में शामिल अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार करने की तैयारी की जा रही है।
कैंट एरिया की तस्वीरें और गुप्त जानकारी लीक
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक की पहचान राजा के रूप में हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि राजा कपूरथला के आर्मी कैंट क्षेत्र में सफाईकर्मी के तौर पर काम करता था। आरोपी को इस नौकरी की आड़ में सैन्य प्रतिष्ठान के अंदर तक एंट्री मिल गई, जिसका उनसे पूरा फायदा उठाया और गुप्त सूचनाएं और तस्वीरें एकत्र की। पुलिस की शुरुआती जांच में यह पता लगा है कि आरोपी राजा अगस्त महीने से पाकिस्तान में बैठे लोगों के लगातार संपर्क में था। उसने कैंट एरिया के महत्वपूर्ण हिस्सों की कुछ तस्वीरें निकाली और अन्य गोपनीय जानकारी जुटाकर अपने पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजी। इस संवेदनशील सैन्य जानकारी को लीक करने के आरोप में पुलिस राजा के साथ इस जासूसी गतिविधि में उसका मदद करने वाले एक अन्य व्यक्ति को भी हिरासत में लिया और अब इनसे पूछताछ की जा रही है।
मोबाइल चैट से हुआ खुलासा
पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, विशेष रूप से मोबाइल फोन की गहन जांच की। इस जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों और पाकिस्तान में मौजूद उनके हैंडलर्स के बीच हुई बातचीत के ठोस सबूत मिले। इन चैट डिटेल्स से स्पष्ट होता है कि वे अगस्त से ही सक्रिय थे और नियमित रूप से संवेदनशील डेटा साझा कर रहे थे। राहत की बात यह है कि पंजाब पुलिस ने समय रहते इस जासूसी रैकेट का पर्दाफाश कर दिया है। अब जांच की जा रही है कि आरोपियों ने संवेदनशील जानकारी किस कीमत पर बेची और इस नेटवर्क की फंडिंग कहां से हो रही थी।
