Chandigarh: चंडीगढ़ में अब कच्‍चे ट्रैक पर नहीं दौड़ेंगे धावक, शुरू हुआ सिंथेटिक ट्रैक पर काम, मिल्खा सिंह की मांग पूरी

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 8, 2023, 08:04 PM IST

Chandigarh: चंडीगढ़ शहर के हजारों एथलीट्स के लिए अच्छी खबर है। सेक्टर-7 स्थित स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में शहर के पहले सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इस ट्रैक का निर्माण कार्य अप्रैल माह तक पूरा हो जाएगा। जिसके बाद एथलीट्स इस पर फर्राटा भर सकेंगे। यह सिंथेटिक ट्रैक इंटरनेशनल मानक के अनुसार, 400 मीटर और आठ लेन का होगा।

KEY HIGHLIGHTS
  • सेक्टर-7 स्थित स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में बन रहा सिंथेटिक ट्रैक
  • 400 मीटर और आठ लेन का होगा यह सिंथेटिक ट्रैक
  • एथलीट्स अप्रैल माह से इस ट्रैक पर भर सकेंगे फर्राटा

Chandigarh: चंडीगढ़ शहर के हजारों एथलीट्स के लिए अच्छी खबर है। अब इन्‍हें कच्‍चे ट्रैक या फिर सड़कों पर नहीं दौड़ना पड़ेगा। उड़न सिख मिल्‍का सिंह की तरह इंटरनेशनल एथलीट्स बनने के अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए ये सभी जल्‍द ही सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ लगा सकेंगे। क्‍योंकि शहर के सेक्टर-7 स्थित स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में पहले सिंथेटिक ट्रैक निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इस ट्रैक का निर्माण कार्य अप्रैल माह तक पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया है, जिसके बाद एथलीट्स इस पर दौड़ लगा सकेंगे। इसकी सबसे खास बात यह है कि, यह सिंथेटिक ट्रैक इंटरनेशनल मानक के अनुसार, 400 मीटर और आठ लेन का होगा।

Synthetic track in Chandigarh

चंडीगढ़ स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण शुरू

इस सिंथेटिक ट्रैक को बिछाने का ठेका दिल्ली की एक कंपनी को 6.50 करोड़ रुपये में मिला है। इस कंपनी के इंजीनियर रचित चौधरी ने बताया कि, यह सिंथेटिक ट्रैक पांच लेयर में बनेगा। यह कंपनी इससे पहले पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम समेत देशभर के कई स्‍टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक बना चुकी है। सिंथेटिक ट्रैक निर्माण के लिए इस कंपनी के दर्जनों प्रशिक्षित कर्मचारियों की टीम दिन रात काम कर रही है। बता दें कि, चंडीगढ़ वर्ल्‍ड क्‍लास सिटी होने के बाद भी यहां अभी तक एक भी सिंथेटिक ट्रैक नहीं है। जिसकी वजह से शहर के खिलाड़ियों को मजबूरन कच्चे ट्रैक पर दौड़ लगानी पड़ती था। बारिश के मौसम में ट्रैक पर पानी और कीचड़ होने के कारण इन्‍हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। जिसकी वजह से कई माह प्रैक्टिस नहीं कर पाते और दूसरे राज्‍य के खिलाड़ियों से पीछे रह जाते।

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