बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सोमवार को बड़ा आदेश दिया। अदालत ने चुनाव आयोग (ECI) को महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट से नाम हटाने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पहले से ही सुप्रीम कोर्ट का आदेश मौजूद है, इसलिए समानांतर कार्यवाही चलाना उचित नहीं होगा।
बॉम्बे हाई कोर्ट
मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने कहा कि वह न्यायिक मर्यादा यानी 'ज्यूडिशियल प्रोप्राइटी' का पालन करेगी। पीठ ने ध्यान दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट नवंबर 2025 में हाई कोर्ट्स को SIR की वैधता और उससे जुड़े अन्य पहलुओं पर याचिकाओं की सुनवाई से रोक चुका है।
ECI ने भी सुप्रीम कोर्ट जाने का दिया हवाला
चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने अदालत को बताया कि कई हाई कोर्ट SIR के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर चुके हैं। कुछ अदालतों ने याचिकाकर्ताओं को जरूरी स्पष्टीकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करने को भी कहा है। इस पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट में मामला पहले से विचाराधीन है और वहां रोक से जुड़ा आदेश भी मौजूद है, तो समान मुद्दे पर अलग से समानांतर मुकदमा चलाने का कोई औचित्य नहीं है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पहले सुप्रीम कोर्ट को इस मामले पर सुनवाई करने दी जानी चाहिए।वोटरों के नाम हटाने पर रोक की मांग भी खारिज
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत से कम से कम इतना अंतरिम निर्देश देने का अनुरोध किया गया कि जब तक सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई नहीं कर लेता, तब तक महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट से किसी भी मतदाता का नाम न हटाया जाए। हालांकि, हाई कोर्ट ने यह अनुरोध भी स्वीकार नहीं किया। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि अदालत ऐसा कोई आदेश जारी नहीं करेगी और न्यायिक मर्यादा का पालन करेगी।अदालत को बताया गया कि यह मामला 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध है। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई करीब तीन सप्ताह बाद करने का फैसला किया।
