Aonla Lok Sabha Election 2024 : आंवला सीट का इतिहास, खिलेगा कमल या साइकिल पकड़ेगी रफ्तार ? जानें कब है मतदान कब आएगा परिणाम

Aonla Lok Sabha Chunav 2024 Polling Date, यूपी लोकसभा चुनाव 2024: यूपी की 80 सीटों में से आंवला सीट पर अबतक 15 बार लोकसभा के चुनाव हो चुके हैं। इस सीट पर पिछले तीन पंचवर्षी से भाजपा का कब्जा है। हालांकि, इस बार समीकरण कुछ बदले से नजर आ रहे हैं। तो चलिए जानते हैं कि 7 मई को होने वाले मतदान से पहले इस सीट का राजनीतिक इतिहास क्या रहा है। साथ ही जानेंगे कि इस बार कौन कैंडिडेट किस पर भारी पड़ रहा है।

BJP vs SP in Aonla Lok Sabha Election 2024 and Poll Date : उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों पर अपना कब्जा जमाने के लिए पार्टियां एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं। फिलहाल, सात चरणों में होने वाले चुनाव के दो चरण संपन्न हो चुके हैं। शेष पांच चरणों के लिए अभी घमासान बाकी है। शेष बची सीटो में से आंवला सीट पर भी तीसरे चरण में 07 मई को वोटिंग होनी है। इस सीट के इतिहास पर नजर डालें तो अब तक यहां 15 बार लोकसभा चुनाव हुए हैं। इस सीट पर पहली बार हिंदू महासभा ने जीत दर्ज की थी। 1962 के बाद सिलसिला आगे बढ़ा और कांग्रेस, जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, जदयू और भाजपा ने भी अपना खाता खोला। जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) को तीन बार जीत नशीब हुई तो कांग्रेस, जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने दो-दो बार जीत हासिल की। इसके अलावा जदयू को एक बार ही जीत नशीब हुई। इस लोकसभा सीट से मेनका गांधी (Maneka Gandhi) भी दांव आजमा चुकी हैं। मौजूदा वक्त में ये सीट बीजेपी के कब्जे में है। भाजपा ने सिटिंग सांसद धर्मेंद्र कश्यप (Dharmendra Kashyap) को एक बार फिर अपना उम्मीदवार बनाकर मैदान में भेजा है। वहीं, समाजवादी पार्टी ने नीरज मौर्य (Neeraj Maurya) को प्रत्याशी घोषित किया है। तो आइये जानते हैं 1962 में अस्तित्व में आई इस सीट का राजनीतिक इतिहास (Aonla Political History) कैसा रहा है और यहां की जनता ने किसको-कितनी बार चुनकर संसद तक पहुंचाया है।

आंवला सीट का जातीय समीकरण

समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नीरज मौर्य आंवला सीट से लोकसभा प्रभारी भी हैं। नीरज की बात करें तो वे शाहजहांपुर के जलालाबाद विधानसभा सीट पर बसपा से दो बार विधायक भी रह चुके हैं। अबकी बार बसपा ने सत्यवीर पर दांव खेला है। इस सीट का जातीय समीकरण बेहद दिलचस्प है। इस सीट पर मुस्लिम, अनुसूचित जाति , यादव, कश्यप, मौर्य और ठाकुर समाज के लोग प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करते हैं। यहां करीब साढ़ें 5 लाख मुस्लिम और अनुसूचित जाति वोटर हैं, जबकि मौर्य और कश्यप ढाई-ढाई लाख हैं। इसके अलावा क्षत्रिय 2 लाख, यादवों की संख्या पौने दो लाख और ब्राम्हाण मतदाता करीब डेढ़ लाख हैं। राजनीति के जानकार और जमीन पर काम करने वालों का मानना है कि इस बार भाजपा उम्मीदवार को सपा प्रत्याशी से कड़ी टक्कर मिल सकती है। मौर्य और कश्यप वोटरों को देखें तो दोनों प्रत्याशियों का पलड़ा भारी है। उधर, मुस्लिम और यादवों की संख्या मिलाकर साढ़े पांच लाख पहुंच रही है। अगर, मुस्लिम वोटर बसपा की तरफ झुकाव न करके सपा के साथ आते हैं तो समीकरण बदल सकते हैं।

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