Punjab News: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर से बीजेपी और अकाली दल के गठबंधन को लेकर हलचल तेज हो गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द गठबंधन का औपचारिक रूप से किया जा सकता है। हालांकि ना ही अकाली दल ने और ना ही बीजेपी ने इस मामले पर खुलकर कुछ भी नहीं कहा है। लेकिन जिस तरीके से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद सुखबीर बादल और उनकी पार्टी ने महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल पर केंद्र सरकार का समर्थन करने का ऐलान किया है उसके बाद से ये अटकलें तेज हो गई हैं।
पंजाब के सबसे पुराने राजनीतिक दल शिरोमणि अकाली दल एक बार फिर बीजेपी के साथ गठबंधन कर सकता है और एनडीए में शामिल हो सकता है शिरोमणि अकाली दल एनडीए के गठन से उसका हिस्सा रहा लेकिन तीन कृषि कानून के विरोध में अकाली दल ने बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ दिया था उसके बाद से पंजाब में दोनों दल अलग-अलग लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं जहां दोनों दल अपना दमखम नहीं दिखा सके और उनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। लेकिन अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दल एक बार फिर साथ आ सकते हैं।
दरअसल हाल ही में शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी और इस मुलाकात के अगले ही दिन शिरोमणि अकाली दल ने महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल के समर्थन का ऐलान कर दिया था। उसके बाद ही माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री से जो सुखबीर सिंह बादल की जो बातचीत हुई है उसमें पंजाब की राजनीति को लेकर भी चर्चा हुई और आगामी विधानसभा चुनाव में 7 चुनाव लड़ने को लेकर भी भले ही कोई फैसला ना हुआ हो लेकिन चर्चा जरूर हुई है। हालांकि पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने इस मामले पर कहा कि सुखबीर सिंह बादल प्रधानमंत्री से मिले हैं तो इसमें क्या अलग बात है। प्रधानमंत्री से तो कोई भी मिल सकता है और सुखबीर सिंह बादल तो पूर्व उप मुख्यमंत्री हैं और बड़ी पार्टी के नेता हैं। बीजेपी राज्य की सारी 117 सीटों पर चुनाव की तैयारी कर रही है।
वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पंजाब में बीजेपी का गठबंधन पंजाब की जनता के साथ है। सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद यह मुद्दा बना दिया गया कि गठबंधन हो रहा है। अकाली दल नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि पार्टी ने 2011 की जनगणना से परिसीमन को लिंक करने का विरोध किया था मगर केंद्र सरकार का प्रस्ताव है कि सभी राज्यों की सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि कर दी जाए। इसका अकाली दल ने समर्थन करने का फैसला लिया है। हालांकि संभावित गठबंधन को लेकर उन्होंने कुछ नहीं कहा लेकिन पार्टी द्वारा इन मुद्दों पर खुलकर बीजेपी का समर्थन करने की घोषणा करने को भी दोनों दलों में चल रही गठबंधन को चर्चाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
वहीं कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने कहा अकाली दल अगर बीजेपी से गठबंधन कर रहा है तो उसे यह भी बताना चाहिए कि उसने बीजेपी से पहले गठबंधन क्यों तोड़ा था। और जिन तीन कृषि कानूनों का हवाला देकर गठबंधन तोड़ा गया था, वो आज भी वैसे ही मौजूद है अकाली दल को बीजेपी से गठबंधन का कोई लाभ नहीं होगा उल्टा उनके सिख वोट बैंक में ही सेंध लग सकती है। पंजाब में शहरी इलाकों में बीजेपी की पकड़ मजबूत मानी जाती है जबकि ग्रामीण इलाकों में और खासकर सिख वोट बैंक में अकाली दल की पकड़ मजबूत है बिना गठबंधन के दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़कर देख चुके हैं जहां बेहतर नतीजे सामने नहीं आए हैं। हालांकि भाजपा गठबंधन में अब बड़े भाई की भूमिका में आना चाहती है और वो अकाली दल के जूनियर पार्टनर के तौर पर इस गठबंधन में नहीं शामिल होना चाहती है। इसी वजह से अब तक गठबंधन व्यवस्था नहीं हो सका है लेकिन अब दोनों दलों में सहमती बनती नजर आ रही है।
