बीकानेर के पीबीएम अस्पताल के जनाना वार्ड में सिजेरियन और सामान्य डिलीवरी के बाद पांच प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने का मामला सामने आया है। सभी महिलाओं का आईसीयू में उपचार चल रहा है, जबकि एक महिला वेंटिलेटर सपोर्ट पर है। मामले को लेकर चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर और स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है।
पीबीएम अस्पताल में 5 प्रसूताओं की किडनी प्रभावित
चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने बताया कि मरीज अलग-अलग तारीखों में अस्पताल पहुंचे हैं और अधिकांश की हालत में सुधार हो रहा है। तीन मरीजों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई गई है। मंत्री ने कहा कि बीकानेर में अत्यधिक गर्मी और डी-हाइड्रेशन की समस्या बढ़ी है। प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के पीछे यही प्रमुख कारण सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक किसी मरीज की मौत नहीं हुई है।
स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि पहला मामला 15 मई का है, जिसमें 20 वर्षीय गर्भवती महिला हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के कारण गंभीर हुई। वह वर्तमान में वेंटिलेटर और डायलिसिस पर है।
राठौड़ ने बताया कि अन्य मरीज 24 मई, 26 मई और 3 जून को अस्पताल में भर्ती हुई थीं। इनमें दो सामान्य डिलीवरी और तीन सिजेरियन डिलीवरी के मामले शामिल हैं।
एनीमिया के कारण किडनी और लीवर पर असर
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सभी मामलों की अलग-अलग जांच की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव और एनीमिया के कारण किडनी और लीवर पर असर पड़ सकता है, जिससे मरीज की हालत गंभीर हो जाती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह सभी केस अलग-अलग परिस्थितियों वाले हैं और इनमें कोई समान कारण अभी तक सामने नहीं आया है। सभी मरीजों का विशेष निगरानी में उपचार जारी है।
कोटा में सामने आए पूर्व मामले से इस घटना का कोई संबंध नहीं बताया गया है। कोटा मामले की विभिन्न स्तरों पर जांच हो चुकी है और उसकी रिपोर्ट का भी अध्ययन किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने दवाओं, उपकरणों और अन्य नमूनों की जांच कराई है। अतिरिक्त जांच के लिए जोधपुर से भी विशेषज्ञ टीम भेजी गई है।
मंत्री खींवसर ने कहा कि राज्य सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है और सभी मरीजों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए गए हैं। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
