Patna Digital Arrest Case: साइबर अपराधियों ने अब लोगों को मानसिक रूप से बंधक बनाकर ठगने का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका ढूंढ निकाला है, जिसे 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) कहा जा रहा है। पटना के फुलवारीशरीफ इलाके में साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड आयुष प्रोफेसर और उनकी बीमार पत्नी को लगातार 13 दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए चौबीसों घंटे अपनी मानसिक कैद में रखा। ठगों ने खुद को एटीएस (ATS) और जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर उन्हें आतंकी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। इस खौफ के साए में बुजुर्ग प्रोफेसर ने अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई कुल 82 लाख 53 हजार रुपये साइबर अपराधियों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।
मुस्लिम प्रोफेसर से कहा- आप पर देशद्रोह का मुकदमा और फिर 13 दिनों तक वीडियो कॉल पर रखा 'कैद', 82.53 लाख ठगे
घबराएं नहीं, धैर्य रखें
अगर आपके मोबाइल पर किसी अनजान नंबर से फोन आए... और सामने वाला खुद को ATS, CBI, ED, पुलिस या किसी बड़ी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताए... आपको किसी संगीन केस में फंसाने या तुरंत गिरफ्तारी की धमकी दे... तो घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत सावधान हो जाइए! क्योंकि ऐसी ही एक फर्जी कॉल ने पटना के एक रिटायर्ड आयुष प्रोफेसर की जिंदगी भर की कमाई चंद दिनों में लूट ली। साइबर ठगों ने उन्हें और उनकी बीमार पत्नी को पूरे 13 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और डरा-धमकाकर 82 लाख 53 हजार रुपये ऐंठ लिए।
अब पढ़ें पूरा मामला
पटना के फुलवारीशरीफ (नयाटोला) के रहने वाले रिटायर्ड आयुष डॉक्टर एवं प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद गयासुद्दीन साइबर अपराधियों के एक ऐसे खतरनाक और अदृश्य जाल में फंसे कि वह लगातार 13 दिनों तक मानसिक कैद में रहे। शातिर अपराधियों ने प्रोफेसर और उनकी बीमार पत्नी को दो अलग-अलग मोबाइल फोन पर चौबीसों घंटे व्हाट्सएप वीडियो कॉलिंग के जरिए अपने सामने रोके रखा और उनकी हर हरकत पर पैनी नजर रखी।
ठगों ने खुद को एटीएस (ATS) का सीनियर अफसर बताया और दावा किया कि प्रोफेसर का बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी गतिविधियों (Terror Funding) में शामिल है, जिसकी जांच चल रही है। बदनामी और तुरंत जेल जाने के डर से सहमे बुजुर्ग प्रोफेसर को ठगों ने किसी से भी बात करने या कमरा छोड़ने से सख्त मना कर दिया।
27 मार्च को आए एक अनजान फोन कॉल के बाद से प्रोफेसर के घर में डिजिटल अरेस्ट का यह खौफनाक खेल शुरू हुआ था। लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी रखते हुए ठगों ने प्रोफेसर पर मानसिक दबाव बनाया और उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों से पूरी तरह अलग कर दिया। इसके बाद, खाते की 'अधिकारिक जांच और वेरिफिकेशन' के नाम पर ठगों ने उनसे अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने को कहा।
पैसे मिलते ही फोन बंद, संपर्क टूटा
खौफ के इस माहौल में अपनी बेगुनाही साबित करने के चक्कर में प्रोफेसर ने एसबीआई (SBI) नेट बैंकिंग और यूपीआई (UPI) के माध्यम से किस्तों में कुल 82 लाख 53 हजार रुपये अपराधियों द्वारा बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब रकम ट्रांसफर होने के बाद ठगों ने अचानक अपने फोन बंद कर दिए और संपर्क टूट गया, तब जाकर प्रोफेसर को अहसास हुआ कि वे एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं।
करोड़पति से लगभग कंगाल हो चुके पीड़ित प्रोफेसर ने अब पटना के साइबर थाने में इस मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर साइबर अपराधियों के बैंक खातों और लोकेशन को ट्रेस करना शुरू कर दिया है। पटना साइबर थाना के थानाध्यक्ष सह पुलिस उपाधीक्षक (DSP) नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि इस साल का यह ऐसा पहला बड़ा मामला सामने आया है जिसमें इतने लंबे समय तक किसी को डिजिटल अरेस्ट रखकर इतनी बड़ी ठगी की गई है। पुलिस की विशेष टीम अपराधियों के बेहद करीब है और जल्द ही गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा।
साइबर पुलिस की जरूरी सलाह: याद रखें ये बातें
साइबर डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने आम जनता को सचेत करते हुए बताया कि देश में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
कोई भी एजेंसी फोन पर अरेस्ट नहीं करती: भारत की कोई भी कानून प्रवर्तन एजेंसी जैसे—पुलिस, एटीएस, सीबीआई, ईडी या टैक्स विभाग कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर किसी को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती।
पैसे ट्रांसफर करने का कोई नियम नहीं: कोई भी सरकारी विभाग जांच के नाम पर किसी नागरिक से अपने निजी या गोपनीय खातों में पैसे ट्रांसफर करने की मांग नहीं करता।
तुरंत करें ये काम: अगर ऐसी कोई संदिग्ध कॉल आती है, तो बिना घबराए तुरंत कॉल काटें। मामले की सूचना तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें या अपने नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
दानापुर से अमरजीत शर्मा की रिपोर्ट
