Bihar Panchayat Chunav 2026: 15 साल पुरानी जनगणना बनेगी आधार, रोटेशन नियम से मुखिया-वार्डों की सीटें बदलेंगी; जानें कब होगा चुनाव

बिहार में अक्टूबर-नवंबर में 9 चरणों में पंचायत चुनाव होने की उम्मीद जताई जा रही है। 4 हजार से अधिक पंचायतों और 55 हजार वार्डों का आरक्षण बदलने जा रहा है। इस बार बायोमेट्रिक और AI तकनीक से फर्जी वोटिंग पर रोक की तैयारी है।

बिहार में जमीनी स्तर पर 'गांव की सरकार' चुनने की प्रशासनिक सरगर्मी तेज हो गई है। मौजूदा मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य और जिला परिषद जैसे जनप्रतिनिधियों का 5 साल का कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त हो रहा है, जिससे पहले राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव संपन्न कराने हैं। सुरक्षा के लिहाज से आयोग उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव से पहले ही बिहार में मतदान संपन्न करा लेना चाहता है ताकि सुरक्षा बलों की उपलब्धता में कोई अड़चन न आए। इस महा-अभियान की नोटिफिकेशन अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के पहले पखवाड़े में जारी होने की पूरी संभावना है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव इस साल अक्टूबर और नवंबर के महीने में कराए जाएंगे।

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कम EVM के कारण 9 फेज में होगी वोटिंग (AI Image)

कम EVM के कारण 9 चरणों में वोटिंग

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस बार बिहार पंचायत चुनाव 9 चरणों में आयोजित किए जाएंगे। पिछले चुनाव (2021) में 11 चरण रखे गए थे। चरणों की इस संख्या की मुख्य वजह आयोग के पास उपलब्ध सीमित इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) हैं। वर्तमान में आयोग के पास 32 हजार EVM उपलब्ध हैं। रणनीति के तहत आयोग हर जिले को दो चरणों के लिए EVM आवंटित करेगा, जिसे रोटेशन के आधार पर इस्तेमाल किया जाएगा। यानी पहले फेज की EVM का दोबारा इस्तेमाल तीसरे फेज में और दूसरे फेज की EVM का इस्तेमाल चौथे फेज में होगा। पंचायत चुनावों के लिए उपयोग की जाने वाली विशेष मल्टी-पोस्ट EVM (MPSV मॉडल) में एक सिक्योर डिटैचेबल मेमोरी मॉड्यूल (SDMM) लगाया जाता है। भारत निर्वाचन आयोग की मुख्य EVM (जिसमें CU, BU और VVPAT होता है) से अलग, इस लोकल बॉडी EVM का यह मॉड्यूल हर चरण की वोटिंग के बाद डेटा को पूरी तरह सुरक्षित रखेगा।

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