Bihar News: बिहार के बाल विकास परियोजना अधिकारियों (CDPO) ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों, विशेष रूप से प्रमोशन और कैडर रिस्ट्रक्चरिंग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। राज्य भर के CDPO के एक प्रतिनिधिमंडल ने बिहार की समाज कल्याण मंत्री श्वेता गुप्ता के सरकारी आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की और अपनी समस्याओं का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। CDPO संघ ने अधिकारियों के अधिकारों में की जा रही कटौती पर भी अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया और पदोन्नति देकर जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (DPO) बनाने की मांग रखी।
मीडिया से बात करतीं मंत्री श्वेता गुप्ता
26 वर्षों से एक ही पद पर काम करने की विवशता
मुलाकात के बाद बिस्फी के CDPO अहमद रजा खान ने संघ का पक्ष रखते हुए टाइम्स नाउ नवभारत को बताया कि विभाग में कैडर पुनर्गठन न होने के कारण अधिकारियों का भविष्य अंधेरे में बना हुआ है। CDPO स्तर-9 में सेवा में योगदान देते हैं। अन्य सरकारी सेवाओं में लेवल-9 पर ज्वाइन करने वाले अधिकारियों को 5 वर्षों में लेवल-11 में पदोन्नति मिल जाती है, जबकि CDPO को इसमें 10 वर्ष से भी अधिक का समय लग रहा है। 2000 बैच के कई CDPO पिछले 26 वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत हैं। वहीं, 2008 बैच को 18 साल और 2019 बैच को 7 साल हो चुके हैं, लेकिन वे अभी भी पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। जिस पद से उनकी बहाली होती है, उसी पद से वे रिटायर हो रहे हैं। संघ ने मंत्री को अवगत कराया कि समय के साथ उनके अधिकारों में भी कटौती की जा रही है, जिसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
मंत्री श्वेता गुप्ता का रुख: 'समस्याओं का समाधान करना मेरी जिम्मेदारी'
CDPO प्रतिनिधिमंडल की बातें सुनने के बाद समाज कल्याण मंत्री श्वेता गुप्ता का रुख बेहद सकारात्मक रहा। उन्होंने अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित समाधान का भरोसा दिया। समाज कल्याण मंत्री श्वेता गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह मेरा अपना विभाग है और यदि अधिकारियों को जमीनी स्तर पर काम करने में कोई कठिनाई आ रही है, तो उसका समाधान करना मेरी प्राथमिकता है। हमारी सरकार का लक्ष्य है कि मुख्यमंत्री जी के सपने के अनुरूप जन कल्याणकारी योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। पदोन्नति और कैडर रिस्ट्रक्चरिंग के विषय पर मैं अधिकारियों के साथ बैठकर आगे की रणनीति बनाऊंगी। अधिकारों में कटौती जैसी कोई दिशा-निर्देश विभाग द्वारा जारी नहीं किए गए हैं, फिर भी इस भ्रम को दूर कर लिया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि विभागीय स्तर पर कैडर रिस्ट्रक्चरिंग की प्रक्रिया कब तक आगे बढ़ती है।
