वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में एमए इतिहास की परीक्षा में पूछे गए ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ सवाल पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अब यह मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, पीएमओ ने वाराणसी मंडलायुक्त के जरिए बीएचयू प्रशासन से इस पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला बीएचयू में हुए एमए इतिहास के चौथे सेमेस्टर की परीक्षा से जुड़ा है। ‘आधुनिक भारतीय समाज में महिलाएं’ विषय के प्रश्नपत्र में छात्रों से एक पूछा गया था कि “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता शब्द से आप क्या समझते हैं? चर्चा कीजिए कि किस प्रकार ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति में बाधा डाली।”
धार्मिक संगठनों ने भी जताई आपत्ति
इस सवाल के सामने आने के बाद राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई धार्मिक संगठनों ने भी इस प्रश्न में 'ब्राह्मणवादी पितृसत्ता' शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य समेत कई लोगों ने इस मामले पर सवाल उठाया है और इसे हिंदुओं की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताया है।
अखिलेश ने बीजेपी पर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मामले को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सुनने में आया है कि बीएचयू के क्वेश्चन पेपर में बेहद टेढ़ा-मेढ़ा सवाल पूछा गया है। अखिलेश यादव ने कहा कि बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान, जिसकी स्थापना पूजनीय मदन मोहन मालवीय ने की थी, वहां इस तरह के सवाल पूछे जाना चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भारतीय जनता पार्टी की सोची-समझी रणनीति है, जिसमें पहले किसी विषय को बदनाम किया जाता है और फिर उसी को लेकर समाज में बहस खड़ी की जाती है। अखिलेश यादव का यह बयान सोशल मीडिया पर भी शेयर किया गया है।
बीएचयू प्रशासन ने क्या कहा?
बीएचयू प्रशासन ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि परीक्षा में पूछे गए सवालों को शैक्षणिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। विश्वविद्यालय के अनुसार, संबंधित प्रश्न ‘वुमेन इन मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री’ विषय के निर्धारित पाठ्यक्रम का हिस्सा था। प्रशासन ने कहा कि विद्यार्थियों में ज्ञान और विश्लेषण क्षमता विकसित करने के लिए जरूरी है कि वे पाठ्यक्रम से जुड़े अलग-अलग पक्षों और संदर्भों को समझें। बीएचयू ने यह भी साफ किया कि इस मुद्दे को लेकर किसी तरह का अनावश्यक विवाद खड़ा नहीं किया जाना चाहिए।
