मध्य प्रदेश में बेतवा नदी के सूखते उद्गम स्थल को फिर से जीवित करने के लिए पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने एक प्रेरणादायक पहल की है। भोपाल, सीहोर, रायसेन और विदिशा जिलों के लोगों ने मिलकर झिरी गांव में मई के अंतिम सप्ताह में 55 छोटे चेक डैम बनाए। इस क्षेत्र में एक साल पहले तक पानी बिल्कुल नहीं था। लेकिन अब सामूहिक प्रयासों से इसमें बदलाव आने लगा है। रविवार 29 जून को ग्रामीणों की मदद से 500 से अधिक फलदार पौधे भी लगाए गए, जिनकी देखभाल की जिम्मेदारी गांववासियों ने ली है।
बेतवा को जीवित करने की स्थानीय लोगों की अनोखी पहल (फाइल फोटो)
इस अभियान का नेतृत्व रिटायर्ड आईआरएस अधिकारी डॉ. आरके पालीवाल कर रहे हैं। उन्होंने तीन साल पहले बेतवा अध्ययन एवं जनजागरण समूह के साथ मिलकर इस संकट को उजागर किया था। सरकार को रिपोर्ट भी दी गई, पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब उन्होंने तीन प्रमुख कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया है: पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर रोक, चेक डैम का निर्माण, और ज्यादा पानी की खपत वाली खेती के बजाय फलदार पौधों को बढ़ावा देना।
इस प्रयास में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने श्रमदान किया। हर परिवार को 10 पौधे सौंपे गए हैं, जिससे उनकी आमदनी भी बढ़ेगी। उम्मीद की जा रही है कि इन कदमों से बेतवा नदी का उद्गम क्षेत्र पुनर्जीवित होगा और भविष्य में जल संकट से राहत मिलेगी।
