MP First Glass Bridge: मध्य प्रदेश को जल्द ही पहला ग्लास ब्रिज मिलने वाला है। इसे पन्ना जिले में बृहस्पति कुंड वॉटरफॉल पर बनाया जा रहा है। इस ग्लास ब्रिज को बनाने के लिए टेंडर जारी हो चुका है। इसके निर्माण के लिए ग्लास ब्रिज के इंजीनियरों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण भी किया। ग्लास ब्रिज बनने के बाद पर्यटक करीब से बृहस्पति कुंड का खूबसूरत नजारा देख सकेंगे।
बृहस्पति कुंड पर बनेगा ग्लास ब्रिज (फोटो साभार - ट्विटर)
बृहस्पति कुंड पर दूर-दूर से आते हैं पर्यटक
बृहस्पति कुंड मध्य प्रदेश का फेमस टूरिस्ट प्लेस है। यह पन्ना जिले से 25 किमी दूरी पर स्थित है। बृहस्पति कुंड पर खूबसूरत वॉटरफॉल बनता है और मॉनसून के समय इसका नजारा और मनोहर हो जाता है। इस वॉटरफॉल को देखने के लिए दूर-दूर से टूरिस्ट यहां आते हैं। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने बृहस्पति कुंड ग्लास ब्रिज बनाने के लिए सरकार के सामने प्रस्ताव रखा। जिसकी मंजूरी पहले ही हो चुकी है। जल्द ही यहां प्रदेश का पहला ग्लास ब्रिज बनने वाला है।
बृहस्पति कुंड पर कैसा होगा ग्लास ब्रिज
एमपी में बृहस्पति कुंड पर बनाए जाने वाला ग्लास ब्रिज कांच से बनने वाला पुल है। इस तरह का पुल पहले भी भारत में बनाया जा चुका है। एमपी का यह ग्लास ब्रिज जमीन पर करीब 28 फुट रहेगा, जबकि हवा में यह 11 फुट निकलेगा। लोगों के जाने के लिए इसमें सीमा तय रहेगी। एक बार में करीब 8-10 लोग ही हवा में निकले हुए हिस्से पर जा सकेंगे। यह हिस्सा पूरी तरह से ग्लास का बना होगा। ग्लास ब्रिज का टेंडर करीब 3 करोड़ में हो चुका है। इसके इंजीनियरों द्वारा ग्लास ब्रिज बनाने के लिए इसका निरीक्षण भी किया जा रहा है।
बृहस्पति कुंड प्रांगण में विकास के कार्य जारी
बृहस्पति कुंड पर ग्लास ब्रिज बनाने के लिए पुरातत्व विभाग द्वारा एक भारी भरकम बजट स्वीकृत किया गया है। इसी क्रम में बृहस्पति कुंड प्रांगण में कई विकास के कार्य जारी है। इसके तहत ग्लास ब्रिज तक पहुंचाने के लिए सुंदर मार्ग बनाया जा रहा है, साथ ही होटल और पार्क रेलिंग का भी निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा सेल्फी व्यू प्वाइंट भी पुरातत्व विभाग द्वारा बनया जा रहा है।
बृहस्पति कुंड का इतिहास
बृहस्पति कुंड के इतिहास की बात करें तो इसे लेकर प्राचीन धार्मिक मान्यताएं फेमस हैं। ऐसा माना जाता है कि इस स्थान पर पहले ऋषि मुनियों के आश्रम हुआ करते थे। त्रेता युग में भगवान राम, सीता और लक्ष्मण चित्रकूट वनवास के दौरान ऋषि मुनियों के दर्शन करने के लिए आया करते थे।
