Digvijay singh: मध्य प्रदेश में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों से पहले सीधी जिले के पेशाब कांड और फिर ग्वालियर से सामने आए वीडियो ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। आदिवासी, पिछड़े, दलितों और जल-जंगल जमीन पर एक नई बहस छिड़ गई है। कांग्रेस पार्टी इसे भुनाने की कोशिश कर रही है, तो भाजपा आदिवासियों के बीच डैमेज कंट्रोल में जुटी हुई है।
इसी बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व सर संघचालक गुरु गोलवलकर को लेकर एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि गुरु गोलवलकर जी के दलितों पिछड़ों और मुसलमानों के लिए व राष्ट्रीय जल जंगल ज़मीन पर अधिकार पर क्या विचार थे अवश्य जानिए। दिग्विजय सिंह द्वारा पोस्ट की गई तस्वीर में गुरू गोलवलकर का एक बयान छपा है। इसमें लिखा है- "मैं सारी जिंदगी अंग्रेजों की गुलामी करने के लिए तैयार हूं, लेकिन जो दलित पिछड़ों और मुसलमानों को बराबरी का अधिकार देती हो, ऐसी आजादी मुझे नहीं चाहिए।"
ट्वीट में और क्या-क्या है?
दिग्विजय सिंह द्वारा पोस्ट की गई तस्वीर में गुरू गोलवलकर की तस्वीर है। इसके ऊपर लिखा है- सदाशिव राव गोलवलकर ने अपनी पुस्तक We and our Nationhood Identified में स्पष्ट लिखा है। जब भी सत्ता हाथ लगे तो उसे सबसे पहले सरकार की धन संपत्ति, राज्यों की जमीन और जंगल पर अपने दो तीन विश्वसनीय धनी लोगों को सौंप दें। 95% प्रतिशत जनता को भिखारी बना दें, उसे बाद सात जन्मों तक सत्ता हाथ से नहीं जाएगी।
विवाद की वजह क्या है?
गोलवलकर का यह बयान कितना सच है और कितना झूठ यह तो इतिहास और इसे लिखने वाले ही जानें, लकिन RSS के पूर्व चीफ को लेकर किया गया ट्वीट उनको महंगा पड़ता दिख रहा है। दिग्विजय सिंह के इस ट्वीट पर आरएसएस और भाजपा कार्यकर्ता मुखर हैं। कांग्रेस नेता के खिलाफ नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए इंदौर शहर में भी एफआईआर दर्ज कराई गई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि गोलवलकर जी के आदिवासी, पिछड़े और दलितों को लेकर ऐसे विचार कभी नहीं थे। कांग्रेस नेता जानबूकर समाज में नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं।
