Ram Mandir Donation Row: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े मामलों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी कार्रवाई का दायरा काफी बढ़ा दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, SIT अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों की जवाबदेही तय करने के अंतिम चरण में है। जांच टीम ने अब ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव के साथ-साथ ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि की प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियों की भी गहन पड़ताल शुरू कर दी है।
SIT जांच की सुई ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष की ओर (फाइल फोटो)
कोषाध्यक्ष की भूमिका पर विशेष फोकस
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर 13 जून को 3 सदस्यीय अधिकारियों की यह SIT गठित की गई थी, जिसने 15 जून को पहली बार अयोध्या पहुंचकर दस्तावेजों को खंगाला था। शासन को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद, SIT की टीम जुलाई के इस दौरे में दो दिनों तक विस्तृत जांच के लिए फिर से अयोध्या पहुंची है।
SIT का इस बार मुख्य फोकस मंदिर के चढ़ावा प्रबंधन और वित्तीय निगरानी में कोषाध्यक्ष की भूमिका का आकलन करना है। इसके लिए SIT की टीम अयोध्या स्थित वैदेही भवन भी पहुंची, जहां स्वामी गोविंद देव गिरि प्रवास करते हैं। टीम ने वहां के महंत और सेवादारों से उनके ठहरने की व्यवस्था, अन्य प्रशासनिक पहलुओं और व्यवस्थाओं को लेकर विस्तार से पूछताछ की। साथ ही कोषाध्यक्ष से जुड़े महत्वपूर्ण वित्तीय अभिलेखों और तथ्यों का भी गहन सत्यापन किया गया है।
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दो दिन में आएगी अंतिम रिपोर्ट
सूत्रों का दावा है कि SIT अगले दो दिनों के भीतर उत्तर प्रदेश शासन को अपनी अंतिम और पूर्ण रिपोर्ट सौंप सकती है। चूंकि यह मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए राज्य सरकार इस रिपोर्ट को प्राप्त करने के बाद सीलबंद लिफाफे में सीधे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करेगी।
इस अंतिम रिपोर्ट के सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका, वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही की पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर शासन आने वाले दिनों में मंदिर प्रबंधन को लेकर कई बड़े और कड़े प्रशासनिक फैसले ले सकता है।
